चुनाव में जीत से इनेलो नेताओं और कार्यकर्ताओं में नए रक्त का संचार होगा। पार्टी दोफाड़ होने के बाद विधानसभा चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतर सकेगी। क्योंकि, इनेलो 14 साल से सत्ता से दूर चल रही है। उधर, कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव बेहद अहम है। सत्ता वापसी का सपना देख रही कांग्रेस को इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना ही होगा। गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस ने अगर धड़ों में बंटकर चुनाव लड़ा तो विरोधियों को फायदा मिलेगा। इसलिए पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को मनमुटाव दूर कर निगम चुनावों में एक साथ ताल ठोकनी होगी।
नतीजे पक्ष में न आने पर विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। साथ ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को जो सत्ता वापसी की किरण दिखाई दे रही है, उसे झटका लगेगा। निगम चुनावों के परिणाम निसंदेह ही विधानसभा चुनावों से पहले सत्ता का सेमीफाइनल हैं। हरियाणा में चुनाव लड़ने का निर्णय ले चुकी आप और निर्दलीय भी निगम चुनावों में तीनों प्रमुख दलों के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।
तीनों दल चुनाव चिह्न पर ठोकेंगे ताल
भाजपा, कांग्रेस और इनेलो निगम चुनाव अपने चुनाव चिह्न पर लड़ने का मन बना चुके हैं। भाजपा की ओर से सीएम मनोहर लाल, प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, इनेलो की ओर से नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। अशोक तंवर भी चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। दो-तीन दिन के भीतर औपचारिक घोषणा होगी। चुनाव वाले जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं की राय जानने के निर्देश पर्यवेक्षकों को दे दिए गए हैं।