आम तौर पर लोग टैक्स को बचाने की हर कोशिश करते हैं। लेकिन इस मामले में एक ऐसा राज्य भी जिसका कोई जवाब नहीं है। यहां के लोगों ने दिल खोल कर टैक्स चुकाया है। आयकर चुकाने में हरियाणा के करदाता अव्वल हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात और प्रदेश की धीमी अर्थव्यवस्था के कारण के कारण उत्तरी क्षेत्र में लक्ष्य से काफी कम कर की प्राप्ति हुई है। नोटबंदी के कारण जहां उत्तरी क्षेत्र में टैक्स कलेक्शन का आंकड़ा बढ़ा तो दूसरी तरफ जनसंख्या के आधार पर चंडीगढ़ (यूटी) के सर्वाधिक 36.46 फीसदी एसेसी हैं।
वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और चंडीगढ़ में कुल 34959.4 करोड़ का कर संग्रह हो चुका है। इसमें हरियाणा ने आधे से अधिक 18914.8 करोड़ का टैक्स कलेक्शन किया है। उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में पहली बार तय लक्ष्य से 17.66 फीसदी अधिक का कर संग्रह हुआ है। आयकर विभाग के मुख्य प्रमुख आयकर आयुक्त केसी जैन ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए आयकर के बारे में अहम जानकारियां दीं।
जैन ने कहा कि गुरुग्राम, फरीदाबाद में अग्रणी कंपनियों के होने और दिल्ली से नजदीकी होने की वजह से वहां से टैक्स की अधिक प्राप्ति हुई है। जम्मू-कश्मीर के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में केसी जैन ने बताया कि वहां के हालात कुछ अलग हैं, जबकि आर्थिक विकास की रफ्तार भी अन्य राज्यों की तुलना में कम है। इसका असर पंजाब के अमृतसर तक भी पड़ने की बात कही।