हरियाणा के लोकायुक्त कानून में कोई बदलाव नहीं होगा। लोकपाल कानून के दायरे पर विचार करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा मुख्य सचिव एससी चौधरी की अध्यक्षता में गठित की गई कमेटी ने मुख्यमंत्री को अपनी राय भेजी, जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूर कर लिया है।
इस फैसले के साथ प्रदेश में लोकायुक्त को किसी भी मामले में खुद फैसला लेने या कार्रवाई करने का अधिकार नहीं मिल सका है। लोकायुक्त किसी भी मामले में कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को सिफारिश ही कर सकते हैं, जिस पर राज्य सरकार फैसला लेगी कि कार्रवाई की जाए या नहीं।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी में एडवोकेट जनरल हवा सिंह हुड्डा और गृह सचिव पीके गुप्ता भी शामिल थे। कमेटी ने सिफारिश की है कि कानून में बदलाव की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कमेटी की यह सिफारिश मंजूर कर ली है। अमर उजाला के पूछने पर मुख्य सचिव ने इसकी पुष्टि की है।
हरियाणा के लोकायुक्त जस्टिस प्रीतम पाल सिंह ने राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया को कई बार रिपोर्ट सौंपकर मांग कर रखी थी कि लोकायुक्त कानून में संशोधन कर स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार दिया जाए। इसके अतिरिक्त लोकायुक्त कार्यालय की तरफ से दस्तावेज आदि मांगने पर न देने वाले को अवमानना माना जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा में लोकायुक्त कानून हविपा-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल ने बनाया था। तब लोकायुक्त कानून मजबूत था और लोकायुक्त को स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार दिया गया था। मगर ओमप्रकाश चौटाला के मुख्यमंत्री काल में इसे संशोधित कर दिया और स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार समाप्त कर दिया। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में भी इस कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया।