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हरियाणा में हजकां ने भाजपा से नाता तोड़ा

Thu, 28 Aug 2014 01:33 PM IST
डिजिटल टीम/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा से बड़ी खबर आ रही है। सीटों के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में हरियाणा जनहित कांग्रेस पार्टी ने भाजपा से नाता तोड़ लिया है। पार्टी सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई ने चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता में गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया। अब वह कांग्रेस के पूर्व नेता विनोद शर्मा की जन चेतना पार्टी को अपना नया सहयोगी बनाएगी।
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भाजपा को धोखेबाज पार्टी करार देते हुए बिश्नोई ने बताया कि भाजपा ने हमेशा मुझे नीचा दिखाने की कोशिश की है। करनाल में मेरे उम्मीदवार को बीजेपी ने बदलवाया। वादा करके मोदी मेरी रैली में नहीं आए। रेवाड़ी रैली में मोदी ने मेरा नाम तक नहीं लिया। विनोद शर्मा को भाजपा में शामिल होने के लिए सुषमा स्वराज ने रोका।
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लोकसभा चुनाव से ही भाजपा की मंशा खराब

कुलदीप ने आगे बताया कि लोकसभा सीटों पर भाजपा ने हमें 2 सीटें दी, जबकि खुद 8 सीटों पर लड़े। उन दोनों सीटों पर भाजपा ने ही हमें हराया। भाजपा हमें शुरू से ही धोखा देती आ रही है। लोकसभा चुनाव से ही भाजपा की मंशा खराब थी और हमारी शुरू से ही नीयत साफ थी।

चाहे मोदी की रैली थी, सुषमा की रैली थी, राजनाथ की रैली थी, हमने शुरू से ही पार्टी के दिग्गज नेताओं को उनकी रैली में भेजा, लेकिन भाजपा ने पल-पल हमारे साथ धोखा किया। 80 फीसदी गांवों में हमारा जनाधार है।

हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं। भाजपा ने केवल मुझे नहीं, देवी लाल, ओम प्रकाश चौटाला को भी धोखा दिया। हम इस धोखेबाज पार्टी का साथ नहीं देंगे। हम जनता के दरबार में अकेले जाएंगे।

इतना कहते हुए कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा से तीन साल पुराना नेता करार खत्म करते हुए गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया। अब हजकां अकेले दम पर हरियाणा विधानसभा चुनाव में उतरेगी।
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लिखित शर्तों के आधार पर हुआ था गठबंधन

दिवंगत मुख्यमंत्री भजनलाल के छोटे बेटे बिश्नोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हमने गठबंधन को बनाए रखने के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश की, लेकिन बीजेपी गठबंधन के सिद्धांतों पर कायम रहने के लिए तैयार नहीं हैं।' इसके जवाब में बीजेपी ने कहा है कि पार्टी गठबंधन को चलाना चाहती थी, लेकिन बिश्नोई की पार्टी कांग्रेस की B टीम की तरह काम कर रही है।

बिश्नोई ने कहा कि हमारा गठबंधन लिखित शर्तों के आधार पर हुआ था। इसके मुताबिक, दोनों पार्टियों के विधानसभ चुनाव में 45-45 सीटों पर लड़ने और जीतने पर ढाई-ढाई साल दोनों का मुख्यमंत्री बनने पर सहमति बनी थी। उन्होंने कहा कि बीजेपी अब इसे मानने को तैयार नहीं है। एचजेसी के एक दूसरे नेता ने बताया, 'हमने गठबंधन को बनाए रखने के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश की। बीजेपी गठबंधन के सिद्धांतों पर कायम रहने के लिए तैयार नहीं है, इसलिए हमने यह फैसला किया।'
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