एचआईवी एड्स से पीड़ित शख्स के साथ डॉक्टरों ने ऐसी हरकत कर दी कि मानवाधिकार के नियम तार-तार हो गए, जानकर होश उड़ जाएंगे। मामला हरियाणा का है। रोहतक निवासी एक एड्स पीड़ित ने योग्यता और कोटे के आधार पर एड्स कंट्रोल सोसाइटी में आईसीटीसी काउंसलर के पद पर आवेदन किया था।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के लिए उसका नाम नोटिस बोर्ड पर एचआईवी पॉजिटिव लिखकर सार्वजनिक कर दिया। पीड़ित ने मामले की शिकायत सीएमओ से की है। उसका कहना है कि नाम सार्वजनिक होने के बाद बेइज्जती के डर से वह अपने घर भी रात में जा पाता है। एड्स पीड़ित का नाम सार्वजनिक होने के बाद विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है।
सीएमओ ने मामले की जांच को कमेटी गठित कर दी है। रोहतक की एक कॉलोनी निवासी व्यक्ति ने बताया कि वर्ष 2013 में उसे खुद के एड्स से ग्रस्त होने के बारे में पता चला। पीजीआई में इलाज चल रहा है। 23 फरवरी को हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसाइटी में कई पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। काउंसलर के पद लिए एड्स पीड़ित के लिए भी सीट आरक्षित रखी गई। आवेदन में ग्रेजुएट और तीन साल का अनुभव मांगा गया।
25 फरवरी को उसने काउंसलर के पद के लिए आवेदन किया। बीती 14 मार्च को सिविल सर्जन के कार्यालय के बाहर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा व साक्षात्कार की जानकारी के लिए लिस्ट चस्पा करा दी गई। 22 को लिखित परीक्षा व साक्षात्कार होने की बात लिखी गई। लिस्ट में उसके नाम व पिता के नाम के साथ-साथ उसके एचआईवी पाजिटिव होने की बात भी सार्वजनिक कर दी गई।