जांच कमेटी ने पाई अधिकारियों की लापरवाही
- मानसून से पहले इन अधिकारियों ने एक भी बैठक नहीं की है। नियम के मुताबिक बैठक होनी चाहिए और इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी चाहिए।
- साल 2020 से यमुना के जलस्तर का रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
- साल 2020 से बैराज के गेट के संचालन का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
- पिछले वर्ष दिल्ली सरकार के पत्र लिखने के बावजूद गेटों का बिजली कनेक्शन चालू नहीं करवाया।
दिल्ली सरकार की भी लापरवाही सामने आई
जांच कमेटी ने दिल्ली सरकार की भी लापरवाही पाई है। यमुना के रास्तों पर दशकों से बड़े स्तर से अतिक्रमण है। इसकी वजह से दिल्ली में बाढ़ का पानी घुसा। गेटों के सामने बड़ी मात्रा में गाद जमा है, जिसे कई सालों से साफ नहीं करवाया गया। कमेटी ने मानसून से पहले सीईवाईडब्ल्यूएस को सिंचाई व बाढ़ से जुड़े दिल्ली, यूपी व संबंधित विभागों से समन्वय बनाते हुए एक तंत्र विकसित करने की सिफारिश की है।
11 लाख क्यूसिक पानी छोड़े जाने के आरोप निराधार
जांच समिति ने दिल्ली सरकार के उन आरोपों को भी सच्चाई से परे बताया, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में 11 लाख क्यूसिक पानी पहुंचा है। उस दौरान तीन लाख 72 हजार क्यूसिक पानी आईटीओ व ओखला बैराज से पास हुआ है। जांच समिति ने यह भी कहा है कि यूवाईआरबी को वजीराबाद, यमुना बैराज आईटीओ और ओखला बैराज पर सभी गेजों को पुन: कैलिब्रेट करने के लिए कहा जाना चाहिए ताकि भविष्य में सही गेजों की रिपोर्ट की जा सके।
अधिकारियों पर कार्रवाई कर खुद को बचा रही हरियाणा सरकार: ढांडा
आप के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुराग ढांडा ने कहा कि अधिकारियों पर कार्रवाई करके हरियाणा सरकार खुद को बचा रही है। दिल्ली में बाढ़ के लिए सिर्फ हरियाणा सरकार जिम्मेदार है। सरकार पूरे देश को बताए कि आईटीओ बैराज के गेट बंद रखने व हथिनी कुंड बैराज वाली साजिश में केवल अधिकारी ही नहीं बल्कि सरकार के मुख्य नेता भी शामिल थे।