हिसार में पत्रकारों से बातचीत करते सरपंच एसोसिएशन के पदाधिकारी
- फोटो : संवाद
अब सत्ताधारी दल के विधायकों के आवास के बाहर देंगे धरना
हिसार। राइट टू रिकॉल व ई-टेंडरिंग के खिलाफ और पंचायतों को पूरे अधिकार देने की मांग को लेकर आंदोलनरत सरपंचों ने सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सरपंचों ने ब्लॉक कार्यालयों से उठकर भाजपा-जजपा के अलावा सरकार में शामिल निर्दलीय विधायकों के आवास पर धरना देने सहित कई फैसले लिए हैं।
सरपंच एसोसिएशन की राज्य कमेटी की बैठक रविवार को गांव गंगवा के ग्राम सचिवालय में हुई। बैठक के बाद एसोसिएशन के राज्य प्रधान रणबीर सिंह समैण ने कहा कि अपनी मांगों को जनता के बीच लेकर जाएंगे और सरकार की पोल खोलेंगे।
उन्होंने संविधान के 73वें संशोधन की 11वीं सूची के 29 नियम पूर्ण रूप से लागू करने, राइट टू रिकॉल विधायक, सांसद व मुख्यमंत्री पर भी लागू करने, ई टेंडरिंग पूर्ण रूप से बंद करना, फैमिली आईडी पूर्ण रूप से बंद करने, काटे गए सभी बीपीएल कार्ड दोबारा बनाने, 9 हजार बिजली की वजह से राशनकार्ड काटने की शर्त वापस लेने, मनरेगा की मजदूरी 600 रुपये करने और सरपंचों का मानदेय 30 हजार व पंचों का मानदेय पांच हजार रुपये करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी सरपंच सरकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगे। सरपंचों ने एक आईटी सेल भी गठित की ताकि जनता तक अपनी बात आसानी से पहुंचाई जा सके। बैठक में 25 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया।