पंचकूला में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री खट्टर
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इस बार जाट आरक्षण आंदोलन की आग में लोग नहीं जलेंगे। इससे निपटने के लिए सरकार ने विशेष रणनीति बना ली है। सोमवार देर शाम मुख्यमंत्री खट्टर के आवास पर रोहतक रेंज के आला पुलिस अधिकारी, प्रदेश के डीजीपी, इंटेलिजेंस विभाग के आईजी, गृह सचिव समेत अनेक अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री ने बैठक की।
माना जा रहा है कि राज्य सरकार जाटों के पूर्व हिंसक आंदोलन जैसा कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती। बैठक में आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए कड़े उपाय करने पर विचार किया गया। इस साल फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के चलते प्रदेश के कई जिलों में अराजकता, हिंसा, आगजनी और लूटपाट की वारदातों ने सरकार की काफी किरकिरी करवाई थी।
हालांकि सरकार ने इसके बाद विधानसभा सत्र में जाटों समेत छह जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग के रूप में नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में आरक्षण देकर इस पूरे मामले को शांत कर दिया था, लेकिन आरक्षण की इस व्यवस्था को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती मिलने के बाद हाईकोर्ट ने आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी। यह मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन पिछली कुछ सुनवाइयों के दौरान राज्य सरकार बैकफुट पर दिखाई देने के कारण जाटों में आरक्षण को लेकर अविश्वास पनपने लगा है।