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Haryana: 4338 निजी स्कूलों को सरकार नहीं देगी राहत, शिक्षा मंत्री बोले- बच्चों का साल नहीं होने देंगे खराब

Thu, 22 Dec 2022 10:22 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि 31 मार्च 2022 के बाद अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को एक साल की एक्सटेंशन नहीं देनी थी तो दाखिलों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एमआईएस पोर्टल क्यों खोला।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा सरकार 4338 निजी स्कूलों को राहत देने के मूड में नहीं है। शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने साफ कर दिया है कि 3000 नॉन एग्जिस्टिंग और 1338 अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों को एक साल की एक्सटेंशन नहीं मिलेगी। इनमें पढ़ रहे बच्चों का साल खराब नहीं होने दिया जाएगा। शीतकालीन सत्र के बाद बोर्ड परीक्षा देने वाले 60 हजार और अन्य 4.40 लाख बच्चों की परीक्षाओं को लेकर सरकार निर्णय लेगी।

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शिक्षा मंत्री के कड़े रुख का निजी स्कूल संचालकों ने विरोध करने का निर्णय लिया है। 23 दिसंबर को वह करनाल के उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर एक वर्ष की एक्सटेंशन बिना देरी देने की मांग करेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि बीते वर्ष एक्सटेंशन देते समय ही निजी स्कूल संचालकों को 2022-23 के शैक्षणिक सत्र के लिए कोई छूट न मिलने के बारे में बता दिया था। उसी समय कहा था कि स्कूलों को जरूरी मानदंड पूरा करने ही होंगे। 

2003 से निजी स्कूलों को मान्यता नियमों में ढील देते आ रहे हैं। एक-एक साल की एक्सटेंशन देते-देते साल 2022 आ गया। थोड़ी-थोड़ी जगह पर स्कूल खोल लिए गए हैं, जिनमें विद्यार्थियों के लिए पूरी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। निजी स्कूलों को एक्सटेंशन लेने पर ध्यान देने के बजाय नियम पूरा करने चाहिए। सरकार अब कोई ढील नहीं बरतेगी। बच्चों के साथ उनकी सहानुभूति है, इसलिए उनके भविष्य की पूरी चिंता है। सरकार 28 दिसंबर के बाद उचित रास्ता निकालेगी।
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एमआईएस पोर्टल क्यों खोला: कुंडू
हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि 31 मार्च 2022 के बाद अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को एक साल की एक्सटेंशन नहीं देनी थी तो दाखिलों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एमआईएस पोर्टल क्यों खोला। बच्चों के दाखिला रोक देने चाहिए थे। इसके बाद विभाग ने एक और गलती की, अस्थायी मान्यता व नॉन एग्जिस्टिंग स्कूलों के बच्चों से स्पोर्ट्स फंड लेते हुए स्कूली खेलों में भी शामिल कराया। विभाग को अपनी गलती भी माननी चाहिए। सरकार अंतिम बार एक्सटेंशन देने पर विचार करे।

स्कूलबंदी ही कर दे विभाग: कुलभूषण
निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा का कहना कि शिक्षा विभाग निजी स्कूलों को बंद ही कर दे। अपनी गलती न मानते हुए वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे स्कूलों को बंद करने का निर्णय गलत है। बच्चों का भविष्य बचाने और पेपर लेने की जिम्मेदारी से विभाग बच नहीं सकता। इन स्कूलों में चिराग योजना के तहत भी विभाग ने दाखिला करवाए हैं। पांच लाख बच्चों को पढ़ा रहे निजी स्कूलों को एक साल की मान्यता न देने के फैसले के पीछे कुछ गड़बड़ नजर आ रही है।

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