हरियाणा सरकार ने अपने एक फरमान से यूटर्न मार लिया है और ऐसा होते ही 8200 लोगों की नौकरी बच गई। रोडेवज के चालक-परिचालकों को पक्के से कच्चा करने के आदेश सरकार ने चार दिन बाद ही वापस ले लिए हैं। 82 सौ चालकों-परिचालकों को एक झटके में बीते 20 नवंबर को नियमित से कच्चा करने का फरमान जारी कर दिया था। साथ ही नियमित वेतनमान देने और बाकी कोई भत्ता न देने के भी आदेश जारी किए गए थे।
साथ ही पक्का होने के बाद दिए गए भत्तों की रिकवरी की जानी थी, लेकिन रोडवेज कर्मचारी यूनियनें परिवहन विभाग के इस आदेश के खिलाफ लामबंद हो गईं और आंदोलन का बिगुल फूंक दिया। इससे सरकार घिर गई। हरियाणा रोडवेज संयुक्त संघर्ष समिति ने फैसला वापस न लेने पर चक्का जाम की तैयारी शुरू कर दी थी, जिससे सरकार को आदेशों की समीक्षा करनी पड़ी। परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार को खुद मोर्चा संभालना पड़ा।
उन्होंने विभाग के उच्च अधिकारियों को बुलाकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों की समीक्षा की। इसके बाद चालकों-परिचालकों को पक्का रखने का ही निर्णय लिया गया। शुक्रवार शाम को परिवहन महानिदेशक डॉ. विकास गुप्ता की ओर से सभी रोडवेज डिपो के महाप्रबंधकों को तत्काल अमल करने का पत्र भी जारी कर दिया गया।
इसमें महानिदेशक ने साफ किया है कि 1-1-2003 को हरियाणा परिवहन विभाग ग्रुप-सी हरियाणा रोडवेज सर्विस रूल्स 2003, संशोधन के तहत भर्ती और दो वर्ष पहले पक्का हुए 82 सौ चालक-परिचालकों को पक्का ही रखा जाए। डिपो महाप्रबंधक इन्हें नियमित वेतनमान के साथ ही अन्य भत्ते और सुविधाएं भी जारी रखें। 20 नवंबर को पत्र जारी करने में हुई चूक के मद्देनजर नए आदेश जारी किए जा रहे हैं, इन्हें अति आवश्यक समझते हुए तुरंत लागू माना जाए।