हरियाणा की खट्टर सरकार और रोडवेज कर्मचारियों के बीच निजी परमिटों पर तलवारें खिंची हुई हैं। न तो सरकार पीछे हटने को तैयार है, न ही रोडवेज कर्मी झुकने के लिए।
रोडवेज का जिम्मा संभाल रही परिवहन विभाग की महानिदेशक अनीता यादव के आदेशों के बाद सभी 22 जिलों के डिपुओं में 120 कर्मियों को निलंबित करने से गतिरोध और बढ़ गया है।
दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता न होने से बुधवार को तीसरे दिन भी रोडवेज बसों का चक्का जाम रहा। प्रदेश में एक भी बस सड़कों पर नहीं उतरी। रोडवेज बसों के न चलने से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, सरकार कोई दिक्कत न होने का दावा कर रही है। अगर सरकार और रोडवेज कर्मियों के बीच गतिरोध न टूटा तो हालात और विकट हो सकते हैं।
सरकार की ओर से रोडवेज यूनियनों को मनाने की कोशिशें भी लगातार जारी है, बुधवार रात भी पंचकूला में परिहवन मंत्री कृष्ण लाल पंवार और हरियाणा रोडवेज ज्वाइंट एक्शन कमेटी के नेताओं के बीच बैठक हुई है। इसमें रोडवेज यूनियनों के नेताओं ने अपना पक्ष एक बार फिर मजबूती से रख दिया है।
रोडवेज के कर्मचारी नेता सरबत पूनिया ने बताया कि उन्होंने मंत्री को बताया है कि 853 निजी परमिट का आवंटन रद हुए बिना हड़ताल खत्म नहीं होगी। अब फैसला सरकार को लेना है।