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Haryana Clerk Strike: लिपिकों की हड़ताल पर सरकार सख्त, 31 से नो वर्क नो पे होगा लागू

Thu, 27 Jul 2023 11:20 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

35,400 मूल वेतन की मांग को लेकर लिपिक पांच जुलाई से हड़ताल पर हैं। अब तक उनकी सरकार ने तीन बार बातचीत हो चुकी है। बुधवार को हुई तीसरी बैठक में सरकार ने 21,700 मूल वेतन का ऑफर दिया था, जिसे लिपिकों ने ठुकरा दिया।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लिपिकों की 23 दिन से चल रही हड़ताल पर हरियाणा सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सरकार ने मूल वेतन 21,700 करने व कुछ अन्य लाभ देने का ऑफर देते हुए कहा कि यदि लिपिक सोमवार तक काम पर नहीं लौटे तो नो वर्क-नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का नियम लागू किया जाएगा। सरकार ने दावा किया कि वह दिल्ली, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से ज्यादा वेतन देने को तैयार है। वहीं, लिपिक संघ ने इस हड़ताल को आत्मसम्मान की लड़ाई बताते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो दूसरे विभागों के कर्मचारियों का भी सहयोग लिया जाएगा।

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गुरुवार को वीडियो संदेश जारी कर मुख्यमंत्री के ओएसडी जवाहर यादव ने कहा कि लिपिकों के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई। सरकार आगे भी बातचीत को तैयार है। लिपिक 19,200 से सीधे लेवल-6 का 35,400 मूल वेतन चाहते हैं। मूल वेतन का लेवल-2 से लेवल-3 किया जा सकता है, सीधे लेवल-6 नहीं दिया जा सकता। उन्होंने बताया कि दूसरे प्रदेशों का मूल्यांकन करवाने पर पता चला कि दिल्ली, हिमाचल, पंजाब और राजस्थान से ज्यादा मूल वेतन देने को हरियाणा सरकार तैयार है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 21,700 तक वेतन बढ़ाने को स्वीकृति दे दी है। जनता को हो रही परेशानियों को देखते हुए क्लर्कां से अपील है कि वे काम पर लौटें, अन्यथा काम नहीं तो वेतन नहीं का नियम लागू होगा। साथ ही कर्मचारियों की हठधर्मिता पर जो नियम लागू होंगे, वह लागू किए जाएंगे। सरकार पदोन्नति में विसंगितयों को भी दूर करने को तैयार है।

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दूसरे कर्मचारियों से कराईं रजिस्ट्रियां

लिपिकों की हड़ताल के कारण जिलों में रजिस्ट्री का काम रुका हुआ है। इस पर गुरुवार को सरकार ने कई जिलों में दूसरे कर्मचारियों को लगाकर तीन सप्ताह से रुकी पड़ी रजिस्ट्रियां भी करवाईं। पंचकूला में 65, झज्जर में 43, सोनीपत में 27, यमुनानगर में 10, अंबाला व रोहतक में 2 रजिस्ट्रियां हुईं।

तीन दौर की हो चुकी बातचीत

35,400 मूल वेतन की मांग को लेकर लिपिक पांच जुलाई से हड़ताल पर हैं। अब तक उनकी सरकार ने तीन बार बातचीत हो चुकी है। बुधवार को हुई तीसरी बैठक में सरकार ने 21,700 मूल वेतन का ऑफर दिया था, जिसे लिपिकों ने ठुकरा दिया।

जब भी बात होगी, वेतन विसंगती दूर करने की मांग होगी: एसोसिएशन

लिपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रांत ने कहा कि सरकार ने सकारात्मक रुख के साथ बातचीत का आश्वासन दिया था लेकिन अब काम नहीं तो वेतन नहीं का आदेश दे रही है। सरकार के ऐसे रवैये के कारण ही लिपिकों ने हड़ताल शुरू की थी। किसानों और सरपंचों के बाद अब सरकार लिपिकों पर लाठियां बरसा सकती है। लिपिक 21,700 का मूल वेतन स्वीकार नहीं करेंगे। भाजपा ने 2014 व 2019 के चुनाव में वेतन विसंगतियां दूर करने का वादा किया था। जब भी बात होगी, वेतन विसंगितयां दूर करने की मांग होगी। अब यह आत्मसम्मान की लड़ाई है।
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