योजना के अंतर्गत पहले ब्लाक करनाल के असंध इलाके में 44500 हेक्टेयर धान के रकबे में से 12000 हेक्टेयर एरिया में मक्का व दलहन की खेती करवाने का टारगेट तय किया गया है। इसी तरह कैथल के पूंडरी में 40000 हेक्टयर धान एरिया में से 11000 हेक्टयर में, जींद के नरवाना में 34907 हेक्टेयर धान एरिया में से 7000 हेक्टेयर में, कुरुक्षेत्र के थानेसर में धान के 18200 हेक्टेयर में से 7000 हेक्टेयर में, अंबाला के अंबाला शहर में धान के 25212 हेक्टेयर में से 8000 हेक्टेयर, यमुनानगर के रादौर में धान के 14000 हेक्टेयर में से 2500 हेक्टेयर व सोनीपत के गन्नौर में धान के 18538 हेक्टेयर में से 2500 हेक्टेयर एरिया में किसानों को मक्का व दलहन की खेती करने का प्रोत्साहित किया जाएगा।
खेती बदली तो ये मिलेगा प्रोत्साहन
- धान के बजाए यदि किसान मक्का व दलहन की फसल लगाता है, तो सरकार उसे प्रति एकड़ 2000 रुपये देगी। 200 रुपये तभी उसके खाते में पहुंच जाएंगे, जब इसके लिए वे कृषि विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाएगा। फसल लगने के बाद वेरिफिकेशन होगी और शेष 1800 तुरंत उसके खाते में पहुंच जाएंगें। 27 मई से यह पोर्टल खोल दिया जाएगा।
- ऐसे किसानों को मक्का व दलहन की खेती के लिए हाई क्वालिटी, हाई इल्ड हाईब्रीड बीज जिसकी कीमत 1200 से 2000 रुपये प्रति एकड़ होगी मुफ्त उपलब्ध करवाएगी।
- इस फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत लाने में किसान के खाते से कटने वाला करीब 766 रुपये का प्रीमियम भी राज्य सरकार देगी।
- खास बात यह कि इस फसल की सरकारी खरीद भी हरियाणा सरकार सुनिश्चित करवाएगी, जिससे किसानों का मुनाफा भी सुनिश्चित होगा।
यह योजना देश में अपनी तरह की एक अनूठी होगी जिसे हरियाणा देश में सबसे पहले लागू कर रहा है। इस योजना के तहत गैर-बासमती धान के क्षेत्र में मक्का फसल के विविधकरण होने से पानी की कुल बचत 0.71 करोड़ सेंटीमीटर यानी लगभग एक लाख लीटर होना अपेक्षित है। इससे पानी, बिजली की बचत और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा। किसानों को सरकार के साथ इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। -मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा