बोर्ड के गठन की अधिसूचना की इतनी क्या जल्दी थी सरकार को : हाईकोर्ट
बुधवार तक इस मामले में जवाब दाखिल करने का सरकार को आदेश
चंडीगढ़। वक्फ बोर्ड के गठन के लिए जारी छह सितंबर की अधिसूचना को चुनौती देने वाली एक याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व भारतीय चुनाव आयोग को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि आचार संहिता लागू होने के बाद वक्फ बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी करने में इतनी जल्दी क्यों दिखाई गई।
एडवोकेट मोहम्मद अरशद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि सरकार ने गैर क़ानूनी ढंग से दूसरी बार बोर्ड का गठन किया है। याचिका में पांच बिंदुओं को आधार बनाते हुए अधिसूचना को रद्द करने की अपील की गई है। सरकार ने किसी भी श्रेणी व मेंबर की श्रेणी का खुलासा नहीं किया, जो हरियाणा वक्फ अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। कोई भी बोर्ड गठित होने के नामित और निर्वाचित सदस्य होने अनिवार्य हैं। धारा 14 के अनुसार निर्वाचित सदस्यों की संख्या हमेशा नामित सदस्यों से अधिक होनी चाहिए। इस अधिसूचना में ऐसा नहीं है और सभी सदस्य नामित हैं। अधिसूचना के अनुसार श्रेणी नंबर दो के अल्ताफ़ हुसैन को मुस्लिम वरिष्ठ वकील की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन ये मेंबर संबंधित बार काउंसिल यानी पंजाब एवं हरियाणा में पंजीकृत नहीं है। मुस्लिम वरिष्ठ वकील की श्रेणी में केवल चुनाव से ही चयन हो सकता है। बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा ने सात वकीलों के नाम सरकार को भेजे थे, उन पर कोई गौर नहीं किया गया। दूसरी ओर विधायक श्रेणी में कोई भी चुनाव नहीं कराया गया, यह सीधे तौर पर वक्फ अधिनियम का उल्लंघन है। इसके अलावा याची ने बताया कि आचार संहिता का उल्लंघन कर अधिसूचना जारी की गई है।