महेंद्रगढ़ के कनीना स्कूल बस हादसे से सबक लेते हुए हरियाणा सरकार अब सुरक्षित स्कूल वाहन नीति -2024 लेकर आ रही है। इस नीति का मकसद बस से जाने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना है।
सरकार ने नीति में प्रावधान किया है कि स्कूल खुलने या बंद होने पर प्रबंधन को अपने खर्चें व कर्मचारियों के माध्यम से स्कूल परिसर का ट्रैफिक नियंत्रित करेगा। इसके साथ वन वे ट्रैफिक को भी नियंत्रित करेगा, ताकि बच्चे सुरक्षित सड़क पार कर सकेंगे। यदि जरूरी हो तो प्रारंभिक योजना व सलाह के लिए यातायात पुलिस की मदद ली जा सकती है। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन स्कूल परिवहन सुविधा का उपयोग करने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों से ड्राइवर-कंडक्टर परिचालक के आचरण के संबंध में समय-समय पर फीडबैक लेगी और उनका रिकॉर्ड भी रखेगी। यदि कोई ड्राइवर नशे में पाया जाता है तो उसे तुरंत बर्खास्त करना होगा। स्कूल प्रबंधन अपने संकाय या कर्मचारियों में से एक को परिवहन प्रबंधक के रूप में नियुक्त करेगा, ताकि नीतियों को सही तरह से लागू किया जा सके।
हर स्कूल प्रबंधन को प्रत्येक साल एक जुलाई और एक जनवरी को निर्धारित प्रारूप के अनुसार नोटरी द्वारा विधिवत सत्यापित शपथ पत्र के माध्यम से नीति के अनुपालन का स्व-प्रमाणन प्रस्तुत करना होगा। इसमें बताना होगा कि स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी लागू की या नहीं। इसके साथ यह भी जानकारी देनी होगी कि स्कूल ड्राइवरों की कितने बार शराब व ड्रग्स की जांच करवाई। यदि कोई ड्राइवर नशे में मिला तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। शिक्षा विभाग को स्व-प्रमाणन को अनिवार्य अनुलग्नलों में शामिल करेगा।
नीति के मुताबिक जिला कमेटी व सब कमेटी को हर महीने स्कूलों और वाहनों की जांच करनी होगी। साथ ही यह भी बताना होगा कि चालान जारी किए और कितने वाहनों को इंपाउड किया गया। यह जानकारी एक निश्चित प्रारूप में हर महीने परिवहन आयुक्त को भेजनी होगी। इसके साथ ही इन कमेटियों को हर महीने जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्यों के साथ बैठक करनी होगी।