पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर सोमवार को हरियाणा सरकार ने प्रदेश के लोकायुक्त पद पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एनके अग्रवाल की नियुक्ति का सारा रिकार्ड पेश करते हुए दावा किया कि लोकायुक्त की नियुक्ति तय नियमों के अनुसार ही की गई है।
हरियाणा के एडवोकेट जनरल ने जस्टिस आरएस मलिक की बेंच के समक्ष सरकार का जवाब दाखिल किया। इस मामले पर अब मंगलवार को सुनवाई होगी। पंचकूला निवासी रविंदर नरवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस नवल किशोर अग्रवाल को हरियाणा का लोकायुक्त नियुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि लोकायुक्त प्रीतमपाल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से यह पद रिक्त था। याचिकाकर्ता ने पहले तो अपनी याचिका में इस पद को भरने की अपील की थी, लेकिन इस याचिका पर सुनवाई के दौरान ही हरियाणा सरकार ने जस्टिस एनके अग्रवाल को लोकायुक्त नियुक्त करने का फैसला ले लिया। इसके चलते याचिका समाप्त हो गई थी।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने नए सिरे से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि जस्टिस एनके अग्रवाल इससे पूर्व आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल कोलकाता में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हरियाणा के लोकायुक्त का पद उन्हें देने के लिए मुख्यमंत्री की ओर से राज्यपाल को सिफारिश की गई, जिसके बाद इस मामले में एडवोकेट जनरल की राय मांगी गई।
जब जस्टिस अग्रवाल को नियुक्ति देने का फैसला कर लिया गया तो जस्टिस अग्रवाल ने एएफटी के ज्युडीशियल मेंबर पद से त्यागपत्र दे दिया। याचिकाकर्ता ने आर्मड फोर्सेज ट्रिब्यूनल एक्ट 2007 का हवाला देते हुए कहा है कि इस एक्ट के सेक्शन 11 के तहत पूर्व जस्टिस अग्रवाल को किसी अन्य ट्रिब्यूनल का सदस्य तो बनाया जा सकता है, लेकिन उन्हें किसी राज्य या केंद्र सरकार द्वारा किसी संवैधानिक पद पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता ने इस बारे में राज्यपाल को भी पत्र लिखा, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने पूर्व जस्टिस अग्रवाल को लोकायुक्त के तौर पर नियुक्ति दे दी।