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Haryana: 2027 तक खत्म होंगे पराली जलाने के मामले, सरकार ने दी एक्स-सीटू प्रबंधन नीति को मंजूरी

Mon, 04 Dec 2023 07:58 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पराली जलाने के मामले में पंजाब के बाद हरियाणा का ही नंबर आता है। इस बार अक्तूबर के महीने में बारिश नहीं हुई, इसलिए किसानों ने सितंबर के दूसरे हफ्ते में ही पराली जलाना शुरू कर दिया था। इससे अक्तूबर के महीने में प्रदूषण काफी बढ़ गया।
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हरियाणा में जली पराली - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा सरकार ने साल 2027 तक पराली जलाने के मामलों को पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सरकार ने एक्स-सीटू प्रबंधन नीति को मंजूरी दे दी है। इसके तहत खेत से बाहर पराली का निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। 

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इस नीति के तहत आने वाले चार सालों में राज्य सरकार पराली का इस्तेमाल बायोमास आधरित बिजली परियोजनाओं, उद्योगों, बायोगैस संयंत्रों, पैलेट, ऊर्जा संयत्रों, ईंट-भट्टों, पैकेजिंग सामग्री, कृषि पैनलों और जैव ईधन बनाने वाले उद्योगों में करेगी। इन उद्योगों को पराली का इस्तेमाल करने पर सरकार वित्तीय प्रोत्साहन भी देगी। यदि यह उद्योग पराली के निस्तारण से संबंधित उपकरण लगाने व प्रौद्योगिकी के लिए वित्तीय प्रोत्साहन करेगी। इसके अलावा सरकार धान की पराली के नवीन उपयोगों के खोज व अनुसंधान के लिए काम करेगी। 

नई नीति के तहत उद्योग एवं वाणिज्य विभाग धान की पराली का उपयोग करने वाले उद्योगों को ऋण पर ब्याज अनुदान देने का प्रावधान बनाएगा। इसके साथ ही उद्योगों तक पराली की आपूर्ति बनाने के लिए कृषि विभाग किसान, उद्योगों और गौशालाओं के बीच पोर्टल के माध्यम से समन्वय बनाएगा। 
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पैदा हुई 73 लाख मीट्रिक टल पराली
हरियाणा में इस सीजन करीब 73 लाख मीट्रिक टन पराली पैदा हुई। इनमें से 24 लाख मीट्रिक टन का उपयोग पशु चारे के रूप में किया गया। करीब 31 लाख मीट्रिक टन का इन-सीटू और 17 लाख मीट्रिक टन एक्स सीटू प्रणाली के तहत प्रबंधन किया गया। बाकी पराली को किसानों ने जला दिया। हालांकि पिछले तीन सालों में हरियाणा में इस बार सबसे कम पराली जली। 15 सितंबर से लेकर 30 नवंबर तक पराली जलाने के सिर्फ 2303 मामले आए, जो 2022 के मुकाबले 37 फीसदी और 2021 के मुकाबले 67 फीसदी कम रहे। वहीं 2020 की तुलना में 45 फीसदी मामले कम रहे। 

कृषि मंत्री जेपी दलाल ने बताया कि अगले साल सरकार की पूरी कोशिश रहेगी कि पराली जलाने के मामलों को शून्य पर लेकर आएं। बीते चार सालों में 80071 मशीनें किसानों को सब्सिडी में उपलब्ध करवाई गई है। मशीनों की खरीद पर सरकार 65 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा ग्राम पंचाचतों को भी हमनें प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाई। पराली के मामले कम लाने में उनकी भी अहम भूमिका रही। पराली के रेड जोन से ग्रीन जोन लाने वाली पंचायतों को एक लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई।

पराली जलते ही बढ़ जाता है प्रदूषण
पराली जलाने के मामले में पंजाब के बाद हरियाणा का ही नंबर आता है। इस बार अक्तूबर के महीने में बारिश नहीं हुई, इसलिए किसानों ने सितंबर के दूसरे हफ्ते में ही पराली जलाना शुरू कर दिया था। इससे अक्तूबर के महीने में प्रदूषण काफी बढ़ गया। हरियाणा के 11 शहर प्रदूषण की चपेट में आ गए। प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी तो कम थी, लेकिन प्रदूषण के दूसरे स्रोतों को बढ़ाने में पराली जलाने से निकले धुएं की अहम भूमिका रही।
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पिछले दो सालों में कहां कितनी जली पराली
जिला              2022          2023

जींद               505             335
कैथल             668             270
फतेहाबाद       767             579
अंबाला           227             195
सिरसा            305             162
कुरुक्षेत्र          300             154
करनाल          301             126
हिसार            115             111

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