हरियाणा सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए शैक्षणिक योग्यता के मानक निर्धारित
किए तो विरोधियों ने विधायकों की शैक्षणिक योग्यता का खुलासा कर दिया, जो
शर्मनाक है। मौजूदा विधानसभा में भी कई विधायक दसवीं पास भी नहीं हैं। हालांकि उनकी संख्या बहुत अधिक नहीं है, फिर भी चुनाव प्रत्याशियों के लिए शैक्षिक योग्यता के मानदंड ने राज्य में नई बहस छेड़ दी है कि यह शर्त केवल पंचायत चुनाव के लिए ही क्यों, बाकी चुनावों के लिए क्यों नहीं।
प्रदेश की मौजूदा विधानसभा में चुने गए कुल 90 विधायकों में से 22 यानी 32 फीसदी विधायक अंडर ग्रेजुएट हैं। वहीं चार विधायक दसवीं पास भी नहीं हैं। जबकि केवल दसवीं पास विधायकों की संख्या छह है। 13 विधायक सीनियर सेकेंडरी तक पढ़े हुए हैं। इनके अलावा बाकी विधायकों में ग्रेजुएट और ग्रेजुएट प्रोफेशनल होने के साथ-साथ दो विधायक डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हैं।
आपराधिक रिकार्ड भी है विधायकों का
हरियाणा सरकार ने पंचायत चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण संशोधन किया है, जिसके तहत ऐसे अपराध जिनमें दस साल की सजा हो सकती है या व्यक्ति चार्जशीट किया जा चुका है, तो वह पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता।
हालांकि एसोसिएशन ऑफ डेमोस्टिक रिफार्म (एडीआर) के अनुसार, हरियाणा के 90 विधायकों में छह फीसदी यानी पांच विधायकों के खिलाफ जालसाजी और धमकी देने जैसे आपराधिक मामले हैं। इनमें एक विधायक कांग्रेस, एक हजकां, एक इनेलो और दो भाजपा के हैं।