अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। खेलो इंडिया के तहत राज्यों को खेलों के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सभी राज्यों को फंड आवंटित किया गया है। एक सवाल के जवाब में केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डाॅ. मनसुख मांडविया ने सभी राज्यों को आवंटित बजट का लेखा-जोखा सदन में रखा। इसके मुताबिक हरियाणा को 66.59 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ है, जो कुल बजट का सिर्फ तीन फीसदी हिस्सा है।
वहीं, अरुणाचल प्रदेश को 148.91 करोड़, गुजरात को 426.13 करोड़, कर्नाटक को 109.11 करोड़, यूपी को 438 करोड़ और बिहार को 20 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। हरियाणा राज्य को कम बजट को देखते हुए विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर हो गया है।
सबसे ज्यादा पदक हरियाणा ने जीते पर खेलो इंडिया के बजट में अनदेखी : दीपेंद्र
रोहतक सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा की अनदेखी सिर्फ इस बार के केंद्रीय बजट में नहीं हुई, बल्कि हर मौके पर भाजपा का हरियाणा विरोधी चेहरा देखने को मिला है। पूरी दुनिया में देश का तिरंगा लहराने वाले व देश में सबसे ज्यादा मेडल जीतने वाले हरियाणा के खिलाड़ियों को केंद्र सरकार ने खेलो इंडिया के तहत सिर्फ तीन फीसदी बजट दिया है। यह हरियाणा के साथ भेदभाव नहीं है तो क्या है। केंद्र में मंत्री बने बैठे हरियाणा के तीन-तीन भाजपाई सांसद कभी इस अन्याय के खिलाफ क्यों नहीं बोलते।
हरियाणा से लगातार भेदभाव कर रहा केंद्र: उदयभान
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी उदयभान ने कहा कि मोदी सरकार हरियाणा के साथ लगातार भेदभाव कर रही है। खेलों के सिरमौर हरियाणा को सरकार ने खेलो इंडिया स्कीम के तहत मात्र 3 प्रतिशत बजट दिया है, जबकि विश्वस्तरीय स्पर्धाओं में नगण्य योगदान रखने वाले राज्यों को 20-20 प्रतिशत बजट मुहैया करवाया गया है। देश को ओलंपिक में मिले कुल पदकों में 50 प्रतिशत पदक हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते हैं। केंद्रीय बजट में बीजेपी ने गुजरात के भीतर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर 6000 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही है लेकिन पूरे बजट में खेलों के हब हरियाणा का कहीं जिक्र तक नहीं है।
प्रदेश के साथ यह भेदभाव मंजूर नहीं : अभय
वहीं, इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला ने कहा-हरियाणा के खिलाड़ियों ने सदैव देश का नाम रोशन किया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने हरियाणा को सिर्फ तीन फीसदी बजट दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें गुजरात व अन्य राज्यों के अधिकतम बजट से कोई द्वेष नहीं है। मगर अधिकतम मेडल लाने वाले प्रदेश के साथ यह भेदभाव हमें मंजूर नहीं है।