भाजपा से गच्चा तो निर्दलीय उतरे रणजीत
पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के बेटे 79 वर्षीय रणजीत सिंह दूसरे उम्रदराज नेता हैं। सैनी सरकार में बिजली व जेल मंत्री रहे रणजीत को भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो रानियां सीट से निर्दलीय ही ताल ठोक दी। राज्यसभा सांसद रहे रणजीत 1987 में लोकदल से पहली बार विधायक चुने गए थे।
रामकुमार गौतम का यह आखिरी चुनाव
सफीदों से भाजपा प्रत्याशी राम कुमार गौतम 78 वर्ष के हैं। जजपा के पूर्व विधायक हैं। पिछले चुनाव में भाजपा के दिग्गज कैप्टन अभिमन्यु को नारनौंद विस सीट से हराया था। चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गए थे।
छठी बार भूपेंद्र सिंह हुड्डा
कांग्रेस के पूर्व सीएम और गढ़ी सांपला किलोई सीट से उम्मीदवार 77 साल के भूपेंद्र सिंह हुड्डा सीएम पद के सबसे प्रबल दावेदार हैं। वह पांच बार विधायक और चार बार सांसद रह चुके हैं। मार्च 2005 से 2014 तक हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं।
ज्ञानचंद ने बनाई पहली ई विधानसभा
14वीं विधानसभा के अध्यक्ष रहे ज्ञानचंद गुप्ता लगातार दो बार से विधायक हैं। पंचकूला से भाजपा उम्मीदवार हैं। विस अध्यक्ष रहते उन्होंने हरियाणा विस को देश की पहली ई विधानसभा बनाई, जिससे लाखों रुपये का सरकारी खर्च बचा।
बगावत कर निर्दलीय उतरीं सावित्री
कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद नवीन जिंदल की मां सावित्री जिंदल हिसार सीट से निर्दलीय लड़ रही हैं। 75 वर्ष की सावित्री देश की सबसे अमीर महिला हैं। दो बार विधायक रहीं सावित्री कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहीं।
अंतिम समय में घर वापसी
76 वर्षीय श्याम सिंह राणा यमुनानगर की रादौर सीट से भाजपा उम्मीदवार हैं। 2014 में यहीं से विधायक चुने गए थे। 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा से त्याग पत्र दे दिया था और इनेलो में शामिल हो गए थे। इनेलो ने उन्हें उम्मीदवार भी घोषित कर दिया था, लेकिन दो महीने पहले वह फिर से भाजपा में शामिल हो गए।