भाजपा से अलग होने के बाद हजकां के विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ मिलकर लड़ने की योजना भी ध्वस्त हो गई है। मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और सीटों के बंटवारे पर दोनों पार्टियों के बीच आम सहमति न बन पाने से बसपा और हजकां अब अपने दम पर चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरने जा रही हैं।
बसपा ने चुनाव में परंपरागत वोटों के अलावा गैर जाट वोटों को अपने पक्ष में जुटाने के उद्देश्य से ट्रिपल-ट्वेंटी और डबल बी का नया फार्मूला तैयार किया है। वहीं, हजकां ने भी गैर जाट वोट के अलावा समाज के सभी वर्गों का समर्थन जुटाने के लिए प्रत्याशियों के चयन को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। बसपा के रणनीतिकारों के मुताबिक पार्टी हरियाणा चुनाव के लिए सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला पर काम कर रही है।
इसके तहत टिकट बंटवारे में समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जाना है। इसके लिए ट्रिपल-20 और डबल-बी का फार्मूला तैयार किया गया है। ‘ट्रिपल-20 कोटे के तहत टिकट वितरण में ब्राह्मण, दलित और पिछड़ी जातियों की हिस्सेदारी 20-20 फीसदी होगी यानी 60 फीसदी टिकट इन तीनों जातियों में बराबर-बराबर बांटे जाएंगे।