हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर को हाईकमान ने जोर का झटका धीरे से दिया है। अपने स्तर पर ही विधानसभा चुनाव के लिए कमेटियां बनाने में मशगूल तंवर को प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने आईना दिखाया है। उन्होंने हाल ही में तंवर की गठित इलेक्शन प्लानिंग और मैनेजमेंट कमेटी अमान्य करार दे दी है। आजाद ने दिल्ली में कहा कि कमेटियां बनाने का अधिकारी पीसीसी के पास नहीं है। चुनाव के लिए सभी तरह की कमेटियां एआईसीसी बनाती है। किसी भी तरह की कमेटी बनाना प्रदेश कांग्रेस का काम नहीं है।
अगर प्रदेश स्तर पर कोई कमेटी बनी है तो उसे एआईसीसी का स्वीकृत नहीं है। एआईसीसी प्रदेश के सभी नेताओं से पूछ कर कमेटियां गठित करती है। जो भी इलेक्शन से संबंधित कमेटी पीसीसी ने बनाई है, वह घर में बैठकर बनाई होगी। प्रदेश अध्यक्ष बदलने और नेता प्रतिपक्ष को लेकर आजाद ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जब परिवर्तन हो जाएगा, उसके बाद राज्यों में देखेंगे। जहां-जहां परिवर्तन की जरूरत होगी वहां किया जाएगा।
आजाद का ताजा रुख तंवर खेमे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, चूंकि प्रदेशाध्यक्ष ने पांच जुलाई को ही चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर इलेक्शन प्लानिंग और मैनेजमेंट कमेटी के गठन की घोषणा की थी। तंवर ने इस कमेटी का संयोजक चार महीने पहले पार्टी में शामिल हुए सुदेश अग्रवाल को बनाया था, जबकि तमाम बड़े दिग्गजों भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा, किरण चौधरी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, कुलदीप बिश्नोई, कैप्टन अजय यादव को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।
तंवर ने कहा था कि इस तरह की कमेटी बनाने का अधिकार उनके पास है। जो हाईकमान को नागवार गुजरा। वहीं, हुड्डा सहित तमाम बड़े नेताओं को नजरअंदाज कर अग्रवाल को कमेटी का संयोजक बनाना भी एआईसीसी को रास नहीं आया। गुलाम नबी आजाद के झटके के बाद तंवर भी इस मामले में जल्दी हाईकमान के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं।