मंच से कांग्रेस विधायक रघुबीर कादयान व कर्ण सिंह दलाल ने कहा कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जल्द कांग्रेस आलाकमान से बात करनी होगी क्योंकि अब समय नहीं बचा है। अगर निर्णायक फैसला नहीं लिया गया तो आने वाली पीढ़ी उनको माफ नहीं करेगी। जवाब में हुड्डा ने कहा कि चंडीगढ़ में बैठकर एक 25 सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी में 13 कांग्रेस विधायकों के साथ-साथ 12 पूर्व मंत्री व विधायक होंगे। जो कमेटी निर्णय लेगी, वे उसको मानेंगे।
दीपेंद्र हुड्डा बोले- भाजपा 75 पार नहीं, होगी सत्ता से बाहर
वहीं, पूर्व सांसद व कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि आज प्रदेश की राजनीति दोराहे पर आकर खड़ी हो गई है। प्रदेश वासी सोचे, भाजपा के 5 साल में क्या खोया है, क्या पाया। उन्होंने कहा कि भाजपा विधानसभा चुनाव में 75 पार नहीं, बल्कि सत्ता से बाहर होगी।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा की घोषणाएं
1- OPS लागू करेंगे।
2 - HRA 1जनवरी 16 से।
3- किसानों का कर्ज माफ करेंगे।
4- भूमिहीन किसानों के भी कर्जे माफ।
5- बुढ़ापा पेंसन 5 हजार व 24 हजार की पिछली किस्त।
6 - बेरोजगार भत्ता 7हजार व 10 हजार क्रमशः।
7- ग्रुप D में लगे BA ,MA को ग्रुप C में प्रोमोट ।
8 - 50 हजार सफाईकर्मी भर्ती।
9- आंगनवाड़ी, आशा, मिड डे मील वर्कर को स्थायी के
समान वेतनमान ।
10 - 4 डिप्टी मुख्यमंत्री ।
11- रिजर्वेशन के हिसाब से टिकट वितरण।
12- 75% नौकरी हरियाणा वालों को।
रैली के दौरान हुड्डा ने कहा कि सारे बंधनों से मुक्त होकर आज यहां आया हूँ, भाजपा सरकार ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया, फसलों के दाम नहीं, खाद- बीज के दाम बढाएं हैं। बेरोजगारी को बढ़ावा मिला है, कानून-व्यवस्था का बुरा हाल है, प्रदेश अपराध के मामले में नंबर-वन है। पारदर्शिता केवल लूट करने में की है।
60 हजार करोड़ से 1 लाख करोड़ कर्ज प्रदेश पर हो गया है। लोगों की सरकार बनाने के लिए आया हूँ, मैं रिटायर होना चाहता था लेकिन जनता की लड़ाई लड़ूंगा, अनुच्छेद 370 मामले पर बोले कांग्रेस भटक गई है, मैंने समर्थन भले ही किया हो लेकिन प्रदेश की सरकार से हिसाब लेंगे।
हमारी सरकार बनी तो अपराधियों का सफाया, किसानों का होगा कर्जा माफ, भूमि हीन किसान का भी कर्जा माफ, 2 एकड़ भूमि के किसान बिजली फ्री, कर्मचारियों को आंगनवाड़ी, आशा वर्कर का भत्ता सरकारी के बराबर, सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली, पंजाब की तर्ज पर वेतन, गरीब महिलाओं के लिए 2000 रुपए महीना प्रोत्साहन राशि, गरीब को 2 रुपए गेंहू व 2 रुपए किलो चावल, फसल बीमा की किस्त सरकार भरेगी।
हर परिवार में एक नौकरी, पोस्ट ग्रेजुएट को 10 हजार, ग्रेजुएट को 5 हजार, 50 हजार सफाई कर्मचारियों की भर्ती, बुजुर्गों के लिए 5 हजार रुपए महीना पेंशन, हरियाणा रोडवेज में महिलाओं को कोई किराया नहीं देना होगा। दलित बच्चों को स्कूल में पहली से आठवीं तक 500 रुपए महीना, 9-10वीं को 1000 व 12वीं तक 1500 रुपए महीना।
सरकार बनी तो 4 उप मुख्यमंत्री, हर वर्ग को मिलेगा प्रतिनिधित्व, आरपार की लड़ाई लड़ने के ले तैयार। जनता साथ दे तो 10 साल तक नही हिलूंगा। वहीं हुड्डा ने कहा कि कमेटी का गठन करेंगे। कमेटी में 13 विधायक व वरिष्ठ नेता होंगे जो वो फैसला करेंगे वही माना जाएगा। मैं सभी बंधनों से मुक्त होकर आया हूँ।
हरियाणा की सियासत के अंदर कांग्रेस के दिग्गज मुख्यमंत्री रहे बंसीलाल और भजनलाल की तरह पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रोहतक में हुई महा परिवर्तन रैली को निर्णायक माना जा रहा था। हालांकि इस दौरान उन्होंने कोई नई पार्टी का एलान नहीं किया।
देश व प्रदेश में कांग्रेस सबसे पुरानी पार्टी है। 1966 में प्रदेश बनने के बाद पहले मुख्यमंत्री पंडित भगवत दयाल शर्मा कांग्रेस से ही थे। इसके बाद विशाल हरियाणा पार्टी के राव विरेंद्र सिंह सीएम बने लेकिन लंबा कार्यकाल नहीं खींच सके। बंसीलाल, भजनलान फिर हुड्डा ने लंबी पारी खेली। गैर कांग्रेसी सरकारों में ओपी चौटाला और अब मनोहर लाल सरकार ही कार्यकाल पूरा कर सकी
बंसीलाल ने जहां 90 के दशक में हरियाणा विकास पार्टी गठित की और 1996 में सीएम बने लेकिन बीच में ही सरकार गिर गई। इसके बाद 2004 में भजनलाल के नेतृत्व में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव लड़ा और बहुमत हासिल किया लेकिन हुड्डा सीएम बन गए। भजनलाल ने हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठन किया। हालांकि हजकां ज्यादा कामयाब नहीं हो सकी।
भजनलाल के बाद उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई ने पार्टी का वापस कांग्रेस में विलय कर दिया। 2014 में हार के बाद से कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर चल रही है। एक तरफ अशोक तंवर प्रदेश अध्यक्ष हैं, दूसरी तरफ हुड्डा का अपना सियासत में रुतबा है। हालांकि पहले मेयर फिर लोकसभा चुनाव में करारी हार से कांग्रेस प्रदेश में संघर्ष कर रही है। अब विधानसभा चुनाव से पहले हुड्डा समर्थक चाहते हैं कि कांग्रेस आलाकमान पूर्व सीएम हुड्डा को पार्टी की कमान दें। तभी भाजपा को टक्कर दी जा सकती है।
कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मिलने का समय मांगा था। सोनिया ने कहा था कि जब भी पार्टी नेताओं से मिलूंगी तो सबसे पहले आपको बुलाऊंगी। 22 अगस्त को पूर्व पीएम राजीव गांधी की 75वीं जयंती है। उस दिन या उसके बाद सोनिया गांधी से हुड्डा की मुलाकात हो सकती है।
इस कारण नई पार्टी के गठन या पार्टी में रहने का फैसला 22 अगस्त तक टाल दिया गया है। दूसरा, नई पार्टी के गठन का जोखिम पूर्व सीएम हुड्डा अकेले अपने सिर नहीं लेना चाहते क्योंकि कांग्रेसी नेता अपने हलके के हिसाब से सोच रहे हैं। इस कारण 25 सदस्यीय कमेटी को हुड्डा ने निर्णायक फैसला लेने की जिम्मेदारी दी है।
रैली स्थल पर नहीं दिखा कांग्रेसी झंडा या बैनर
पूर्व सीएम हुड्डा की परिवर्तन महारैली में कांग्रेस का झंडा या बैनर दिखाई नहीं दिए। मंच को भी तिरंगे से सजाया गया था। जगह-जगह कांग्रेसी झंडे की जगह तिरंगा लहरा रहा थे व गुलाबी पगड़ी दिखाई दे रही थी। मंच से एक दर्जन कांग्रेस नेताओं ने लोगों को संबोधित किया, लेकिन गांधी परिवार का खुलकर नाम नहीं लिया। केवल एक बात कही, कांग्रेस आला कमान पूर्व सीएम हुड्डा के हाथ में कमान दे, तभी भाजपा को हराया जा सकता है।
प्रदेश के अंदर कांग्रेसी की अंदरूनी सियासत में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने विरोधियों पर शनिवार को भारी पड़े। क्योंकि पार्टी के एक पूर्व सांसद, 13 विधायक और 70 से अधिक पूर्व विधायक व मंत्रियों ने रैली में पहुंच कर आस्था जताई। हुड्डा ने मंच पर और मंच से नीचे भीड़ जुटाकर आला कमान को सीधा संकेत दिया कि प्रदेश में पूर्व सीएम हुड्डा ही कांग्रेस है। हुड्डा परिवार का गांधी परिवार से घनिष्ठ रिश्ता रहा है। संविधान निर्माता रणबीर सिंह हुड्डा के समय से हुड्डा परिवार की गांधी परिवार की नजदीकियां हैं।
हुड्डा परिवार के कार्यकाल में 18 अगस्त को पहली बार ऐसा हुआ कि विधान सभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व सीएम ने अपने गृह क्षेत्र रोहतक में शक्ति प्रदर्शन कर दिया और मंच से गांधी परिवार को चेतावनी भी दे दी। मंच से हुड्डा ही नहीं उनके कई समर्थकों ने भी घोषणा करते हुए कहा कि वह कांग्रेस के साथ तो हैं, लेकिन हुड्डा के नेतृत्व में ही। यदि उनके नेता भूपेंद्र हुड्डा कोई नया फैसला लेते हैं तो वह उनके साथ हैं। प्रदेश में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा कांग्रेस का नेतृत्व किसी अन्य को नहीं दिया जा सकता।
पूर्व सीएम ने भी अपरोक्ष रूप से स्पष्ट कर दिया कि वह जनता के फैसले के साथ ही रहेंगे। गौरतलब है कि रविवार को हुड्डा की परिवर्तन रैली का मंच पहेलियां बुझा रहा था। ऐसा पहली बार था कि मंच पर गांधी परिवार का पोस्टर या बैनर नहीं था। अंदेशा पहले ही लगाया जा रहा था कि हुड्डा परिवर्तन रैली में नई पार्टी की घोषणा कर सकते हैं। जबकि पूर्व सीएम ने अपने राजनैतिक अनुभव का लाभ उठाते हुए कांग्रेस आलाकमान पर अपने शक्ति प्रदर्शन के साथ दबाव बनाने का प्रयास किया गया है कि पार्टी अब सोच समझ कर ही प्रदेश की बागड़ोर किसी को सौंपें।
गुलाबी पगड़ी के समक्ष नहीं दिखा पटका
परिवर्तन रैली में गुलाबी पगड़ी एक बार फिर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही थी, लेकिन पटका दिखाई नहीं दिया। कांग्रेस में गुलाबी पगड़ी, पटका, रथ व साइकिल के बीच पहले ही शीत युद्ध चल रहा है। यही वजह रही कि रविवार को मंच पर प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर फिर नहीं दिखाई दिए। इसके अलावा कुमारी सैलजा, कैप्टन अजय यादव, रणदीप सुरजेवाला, किरण चौधरी जैसे बडे़ कांग्रेसी नेता भी नदारद रहे।