हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सिखों के 9वें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने कू किया कि 'हार और जीत यह आपकी सोच पर ही निर्भर है, मान लो तो हार है ठान लो तो जीत है।' मानवीय मूल्यों, आदर्शों व सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सिखों के 9वें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी को उनके शहीदी दिवस पर सादर नमन।
नवीन कुमार जिंदल ने भी कू एप पर लिखा कि औरंगजेब द्वारा इस्लामी अत्याचार के विरूद्ध बलिदान देने वाले और सिख धर्म के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी को शहीदी दिवस पर शत्-शत् नमन। विश्व इतिहास में धर्म, मानवीय मूल्यों व आदर्शों की रक्षार्थ प्राणोत्सर्ग करने वालों में गुरु जी का स्थान अद्वितीय है।
”हार और जीत यह आपकी सोच पर ही निर्भर है, मान लो तो हार है ठान लो तो जीत है।” मानवीय मूल्यों, आदर्शों व सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सिखों के 9वें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी को उनके शहीदी दिवस पर सादर नमन। #GuruTegBahadur
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- Manohar Lal (@manoharlalbjp) 24 Nov 2021
औरंगजेब द्वारा इस्लामी अत्याचार के विरूद्ध बलिदान देने वाले और सिख धर्म के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर शत्-शत् नमन। विश्व इतिहास में धर्म, मानवीय मूल्यों व आदर्शों की रक्षार्थ प्राणोत्सर्ग करने वालों में गुरु जी का स्थान अद्वितीय है।
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- Naveen Kumar Jindal 🇮🇳 (@naveenjindalbjp) 24 Nov 2021
पंजाब के अमृतसर में हुआ था जन्म
विश्व इतिहास में धर्म और मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में श्री गुरु तेग बहादुर जी का स्थान अद्वितीय है। श्री गुरु तेग बहादुर जी का जन्म पंजाब के अमृतसर में श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के घर हुआ था। बचपन में उनका नाम त्यागमल था। वे बाल्यकाल से ही धार्मिक, निर्भीक, विचारवान और दयालु स्वभाव के थे।
इस्लाम को कबूलने से किया था मना
सन् 1675 में धर्म की रक्षा के लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी ने अपना बलिदान दिया था। मुगल बादशाह औरंगजेब ने श्री गुरु तेग बहादुर जी को मौत की सजा सुनाई थी, क्योंकि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने इस्लाम धर्म को अपनाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद मुगल बादशाह के आदेश पर सबके सामने गुरु जी का सिर कलम कर दिया गया था। श्री गुरु तेज बहादुर जी को हिंद की चादर का जाता है।
निर्भय आचरण और धर्म के प्रति अडिगता के सर्वोच्च उदाहरण थे गुरु जी
यह गुरु जी के निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण था। गुरु जी मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतंत्रता के लिए अपनी महान शहादत देने वाले एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे।