सरकार के लिए जी का जंजाल बने जाट आरक्षण मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए अब नया सियासी दाव चला है। अब तक नाराज जाट बिरादरी को मनाने अपनी टीम के जाट मंत्रियों को मोर्चे पर लगाने वाले सीएम ने अब गैरजाट नेताओं पर भरोसा किया है।
इस विवाद का हल निकालने के लिए सीएम ने अपने वरिष्ठतम मंत्री रामबिलास शर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। बतौर सदस्य इस कमेटी में सामाजिक न्याय अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और मुख्य संसदीय सचिव कमल गुप्ता को शामिल किया गया है।
सीएम के इस कदम को उनके विरोधियों को दिया गया जवाब माना जा रहा है। गौरतलब है कि हरियाणा में गैर जाटों की उपेक्षा को लेकर मुख्यमंत्री करीब डेढ़ दर्जन विधायकों के निशाने पर हैं। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि यह कमेटी जल्द ही जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ वार्ताओं का दौर शुरू करेगी।
पिछले साल आंदोलन को सुलझाने में असफल रही थी सरकार
मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि इससे पहले हुए हिंसक जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान सीएम ने अपने मंत्रियों कैप्टन अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनखड़ को मोर्चे पर लगाया था। भाजपा नेतृत्व की ओर से केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को अलग से जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, इसके बावजूद हुए हिंसक जाट आंदोलन से सरकार की छवि पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
इसके बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जब एक बार फिर से जाट आरक्षण आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हुई तो भी सीएम ने इन्हीं जाट बिरादरी के मंत्रियों और नेताओं को मोर्चे पर लगाया। हालांकि, इस बीच पश्चिम उत्तर प्रदेश में बेहद प्रभावी माने जाने वाली इस बिरादरी को मनाने के लिए खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को मैदान में उतरना पड़ा था।
सूत्रों का कहना है कि कमेटी का गठन और इसमें एक भी जाट नेता को जगह न देकर मुख्यमंत्री ने एक तीर से दो शिकार किए हैं। एक तरफ जहां उन्होंने नाराज गैरजाट नेताओं को सकारात्मक सियासी संदेश दिया है, वहीं नेतृत्व को यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी टीम के जाट मंत्री इस आंदोलन को सुलझाने में बुरी तरह असफल रहे हैं।
तीसरी बाद होगी जाट नेताओं को मनाने की कोशिश
cm khttar
जाट संगठनों की ओर से 20 मार्च को दिल्ली कूच की घोषणा को देखते हुए हरियाणा सरकार ने जाट नेताओं को एक बार फिर मनाने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से आंदोलनकारियों को डेढ़ महीने में तीसरी बाद बातचीत का आमंत्रण दिया गया है। वीरवार को पानीपत रिफाइनरी में जाट नेताओं के साथ कमेटी की वार्ता होगी।
सरकार ने इस बार शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जिसमें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और मुख्य संसदीय सचिव कमल गुप्ता भी शामिल हैं। उधर, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा है कि उनकी सात सूत्री मांगें पूरी होने के बाद ही धरने खत्म होगी।
पानीपत में वीरवार सुबह 11 बजे से शुरू होने वाली बैठक में जाट नेताओं की तरफ से रखी गई मांगों पर चर्चा होगी। सरकार की कोशिश है कि तीसरी बार होने वाली इस वार्ता के जरिये मामले को ठंडा किया जा सके। यशपाल मलिक का कहना है कि बैठक में करीब 100 प्रतिनिधि शामिल होंगे।