मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान कुछ ढील देकर उद्योगों को दोबारा शुरू किया गया है। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों को सरकार की ओर से विभिन्न प्रकार की रियायतों की जानकारी देते हुए बताया कि जिन औद्योगिक इकाइयों के मार्च, अप्रैल और मई माह के बिजली बिल जनवरी और फरवरी माह की औसत से आधे आएंगे।
उन्हें फिक्स चार्ज में 25 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। शेष 75 प्रतिशत राशि जुलाई से दिसंबर तक 6 बराबर किस्तों में ली जाएगी। एमएसएमई अपने श्रमिकों को समय पर वेतन दे सके। इसके लिए 20 हजार रुपये प्रति श्रमिक की दर से बैंक से ऋण दिलवाने की सुविधा दी गई है। जिसमें 6 महीने तक का ब्याज लाभ हरियाणा सरकार द्वारा दिया जाएगा, जो लगभग ढाई सौ करोड़ रूपया बनेगा।
इस लोन के लिए उन्हें बैंक को किसी प्रकार की कॉलेटरल या गारंटी नहीं देनी है, यदि कोई ऐसा प्रावधान आएगा तो उसकी चिंता प्रदेश सरकार करेगी। उद्योगों द्वारा दिए जा रहे 2 महीने के अग्रिम विकास चार्ज (एडीसी) के ब्याज को बिजली बिलों में समायोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एग्रो इंडस्ट्रीज जिनके 20 किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन है, जिन्हें अब तक लगभग 7.50 और 8 रुपये की दर थी, यह दर 1 अप्रैल से 4.75 रुपये प्रति यूनिट की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह बजट के समय की घोषणा है और इसे लागू करने के लिए विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि एचएसआईआईडीसी द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के अंदर लोगों को प्लॉट दिए हैं। उनमें कुछ विवाद चल रहे हैं। इसके लिए अलग से रिड्रेसल मेकैनिज्म बनाया जाएगा। ताकि जल्द से जल्द इन विवादों का निपटान हो सके।
जो औद्योगिक इकाइयां खुल चुकी हैं, उनमें श्रमिकों को आने-जाने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो और श्रमिक उद्योग के परिसर में ही रहे, इसके लिए उद्योगपतियों की मांग पर औद्योगिक इकाइयों को अपने श्रमिकों के लिए आवास की व्यवस्था के लिए अनुमति दी जाएगी ताकि इन-सीटू रह कर उद्योग को चला सकें।
छह लाख लोग अपने घर जाना चाहते हैं
सीएम ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते पिछले दिनों मजदूरों का पलायन शुरू हुआ था, परंतु जब से सरकार ने एमएसएमई को गति देने की बात शुरू की तब से यह संख्या कम होने लगी है। अब प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों शुरू हो चुकी हैं। इस समय तक लगभग 13 लाख कर्मचारी अपने काम में लग गए हैं।
उम्मीद है कि अब प्रवासी मजदूर यहीं रुकेंगे। फिर भी यदि प्रवासी श्रमिक जाना चाहते हैं तो उनकी जाने की पूर्ण व्यवस्था प्रदेश सरकार करेगी। आने वाले 7 दिन में 100 ट्रेनें चलाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि जो देश के दूर-दराज राज्यों से आए हुए हैं उनका रजिस्ट्रेशन किया है, लगभग 6 लाख लोगों ने जाने की बात कही है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के मध्यम, लघु और सूक्षम उद्यमियों और सभी जिलों के लघु उद्योग भारती एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बातचीत की। बैठक में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा अब अगस्त, 2020 से नई उद्यम प्रोत्साहन नीति तैयार की जा रही है। जिसमें सभी हितधारकों से सुझाव लेकर फिर से देश की सबसे अच्छी उद्योग नीति बनाने का उनका संकल्प है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो महीनों से राजस्व न के बराबर प्राप्त हुआ है। राजस्व मुख्य रूप से जीएसटी, आबकारी, स्टैम्प डयूटी, केन्द्र सरकार से वैट रिफण्ड तथा खनन से प्राप्त होता है। उन्होंने एमएसएमई के बैंक ऋणों का पुर्न आंकलन करवाने का आश्वासन भी दिया। 10 प्रतिशत कार्यशील पूंजी उपलब्ध करवाने की योजना केन्द्र सरकार की ओर से घोषित की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीर्घावधि के ऋणों में एमएसएमई से ली जाने वाली मार्जन मनी को घटा कर 15 प्रतिशत किया जाएगा। सीएम के अनुसार लॉकडाउन अवधि के दौरान हरियाणा में बेहतर प्रबंध किए गए थे। सरकार द्वारा जरूरतमंदों के लिए 1047 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है।