पंजाब-हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) पर हक को लेकर एक बार फिर हरियाणा ने दावा जताया है। हरियाणा ने दावा किया है कि पंजाब यूनिवर्सिटी पर उसका भी हक है और इसका स्टेट्स पहले जैसा पुर्नस्थापित होना चाहिए, ताकि पंजाब व चंडीगढ़ की तरह हरियाणा के कॉलेजों को भी पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता मिल सके और इसका लाभ हरियाणा के छात्र भी उठा सकें।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सितंबर में आयोजित नार्थ जोन के पांच राज्यों की क्षेत्रीय बैठक में भी देश के गृहमंत्री अमित शाह के समक्ष इस मांग को उठाया था। इस बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंद्र सिंह भी मौजूद थे। अब हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने दिल्ली में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मुलाकात कर इस मसले को एक बार फिर उठाया है। काबिले गौर है कि देश के उपराष्ट्रपति पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के चांसलर भी हैं।
इस नाते से हरियाणा के स्पीकर ने उनके समक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठाया है। वेंकैया नायडू ने इस मसले पर स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता विस्तार से बातचीत की। जबकि स्पीकर ने भी उन्हें हरियाणा के दावे का आधार और पंजाब यूनिवर्सिटी के पुराने स्टेट्स के बारे में अवगत करवाते हुए उनसे मांग की है कि पीयू का पहले वाला वास्तविक स्टेट्स को पुर्नस्थापित किया जाए। स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता से बातचीत के दौरान वेंकैया नायडू ने उन्हें आश्वस्त किया कि इस मसले पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा।
हरियाणा की वित्तीय मदद से सुधर सकते हैं पीयू के हालात
पंजाब रि-आर्गेनाइजेशन एक्ट 1966 की धारा 72 की उप धारा (3) व (4) के तहत चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी को हरियाणा और पंजाब राज्य की संयुक्त संपत्ति माना गया था। पीयू की गवर्निंग बॉडी, सीनेट व सिंडिकेट में भी हरियाणा का प्रतिनिधित्व रहता था। मगर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के शासनकाल में अक्टूबर 1997 से उक्त सिस्टम जारी नहीं रह पाया। पहले पंजाब यूनिवर्सिटी का बजट पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा शेयर किया जाता था। मगर आज पीयू को अधिकतर फंडिंग भारत सरकार की ओर से होती है।
वर्तमान स्थिति यदि देखें तो पंजाब सरकार ने पीयू को नामिक बजट तक देने से इंकार कर दिया था। जिसके चलते पंजाब यूनिवर्सिटी वित्तीय संकट में घिर गई, जबकि केंद्रीय बजट से कुछ सहारा मिला। पहले हरियाणा हर साल पंजाब यूनिवर्सिटी को 10 से 20 करोड़ का बजट देता था। धीरे-धीरे पंजाब-हरियाणा के बजट का शेयर 60:40 तक हो गया। मगर आज पंजाब रि-आर्गेनाइजेशन एक्ट 1966 के बावजूद पीयू पर अपना हक जताने से हरियाणा महरूम हैं। उधर, चंडीगढ़ के साथ-साथ पंजाब के विभिन्न जिलों के कई कालेज पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त हैं।
हरियाणा विधानसभा स्पीकर ने भी उपराष्ट्रपति को बताया कि हरियाणा पहले की तरह आज भी पीयू को अपने हिस्से का बजट देने को तैयार है। इसलिए पीयू के पूर्व स्टेट्स पुर्नस्थापित किया जाए, ताकि हरियाणा के विभिन्न जिलों के जो कालेज पीयू से मान्यता लेना चाहें, वे ले सकें। स्पीकर के अनुसार चंडीगढ़ से सटे व नजदीकी हरियाणा के जिलों के कालेज छात्रों को इसका बड़ा फायदा पहुंचेगा और छात्रों की दाखिला, परीक्षा फीस व हरियाणा की ओर से बजट मिलने से पंजाब यूनिवर्सिटी की वित्तीय भी बेहर हो पाएगी।
पंजाब यूनिवर्सिटी पर हरियाणा का हक पहले भी था और आज भी ये स्टेट्स रहना चाहिए। हरियाणा के बहुत से छात्र ऐसे हैं, जो पीयू अथवा पीयू संबंद्ध कॉलेजों में पढ़ना चाहते हैं। पीयू के चांसलर एवं उपराष्ट्रपति से पीयू पर हरियाणा का हक दिलवाने की मांग की गई है, उनका रवैया इस मसले पर साकारात्मक दिखा।
- ज्ञानचंद गुप्ता, स्पीकर, हरियाणा विधानसभा