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विधानसभा मानसून सत्र: हरियाणा में टलेंगी नहीं, सुरक्षित माहौल में होंगी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं

Thu, 27 Aug 2020 12:26 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • सरकार ने विधानसभा में साफ की स्थिति, इस मसले पर पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस
  • शिक्षा मंत्री बोले- हम बच्चों की मेहनत के बदले उन्हें बिना परीक्षा कोरोना वाली डिग्री नहीं देना चाहते
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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हरियाणा सरकार किसी भी सूरत में कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में फाइनल ईयर की परीक्षाएं नहीं टालेगी। परीक्षाओं के इसी मुद्दे पर विधानसभा के मानसून सत्र में पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस हुई। लेकिन सरकार परीक्षा करवाने के अपने रुख पर अड़ी रही। 

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दरअसल, विधानसभा शुरू होने से पूर्व कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक ज्ञापन देते हुए आग्रह किया था कि कांग्रेस सदन में फाइनल ईयर के छात्रों को बिना परीक्षा प्रोमोट करने का मुद्दा उठाएं, क्योंकि प्रदेश में कोरोना महामारी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। इसी के चलते कांग्रेसी विधायकों ने सदन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। 

विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने कहा कि महामारी के इस दौर में सरकार वायरस ग्रस्त लोगों को तो संभाल नहीं पा रही हैं, उस पर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के फाइनल ईयर की परीक्षाएं लेने पर आमादा है।
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गीता भुक्कल ने कहा कि ऐसा करना छात्रों की सेहत से खिलवाड़ करने जैसा हैं। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से इस मामले में पुनर्विचार करने की बात कही। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच बहस भी हुई।

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सदन में विपक्ष का जवाब देते हुए हरियाणा के शिक्षा मंत्री  कंवरपाल ने कहा कि शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया है कि स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कोरोना की परिस्थितियों के अनुसार आयोजित करवाई जाएंगी। चूंकि कोविड-19 के चलते स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षाओं का आयोजन समय पर नहीं करवाया जा सका। मगर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशानुसार स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं के अंतिम वर्ष की डिग्री के लिए परीक्षाएं करवाना अनिवार्य है। 

उन्होंने कहा कि जब एक विद्यार्थी स्नातक स्तर तक की पढ़ाई में 14 वर्ष तक मेहनत करता है और उसे वाजिब डिग्री न हासिल हो तो उसे उचित नहीं कहा जा सकता। हम छात्रों को उनकी मेहनत के बदले कोविड वाली (पास की जगह प्रोमोट करना) डिग्री नहीं देना चाहते। ताकि भविष्य में अपना करियर बनाने के वक्त उनकी डिग्री पर कोई सवाल खड़ा न हो। 

उन्होंने कहा कि इसी को देखते हुए उच्चतर शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा का आयोजन करवाने का निर्णय लिया है, हम उनकी परीक्षा की बेहतर व सुरक्षित व्यवस्था करेंगे। ताकि कोविड-19 के दौरान लागू नियमों का पालन हो और उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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कृषि अध्यादेशों पर चर्चा को तैयार नहीं सरकार

हरियाणा सरकार कृषि संबंधी अध्यादेशों पर कोई फिलहाल चर्चा नहीं करेगी। सरकार का मानना है कि ये तीनों अध्यादेश केंद्र स्तर के हैं। साथ ही केंद्र सरकार ने इन अध्यादेशों पर प्रदेश सरकार से न तो कोई सुझाव मांगे हैं और न ही कोई टिप्पणी, ऐसे में किसी प्रकार की चर्चा का कोई सवाल ही नहीं उठता।

इसी के चलते महम के विधायक बलराज कुंडू के चर्चा संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। इसी बात से नाराज सदन में कुंडू ने कहा कि हरियाणा कृषि प्रधान प्रदेश है और हमें सदन तक पहुंचाने में किसान के वोट का सबसे अहम रोल है। मगर  हैरत की बात है कि कृषि संबंधी तीनों अध्यादेशों की सिफारिशों पर सरकार चर्चा को तैयार ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि चौथा अध्यादेश भी लाया जाए जिसमें एमएसपी से नीचे फसल खरीद करने पर कानूनन सजा एवं जुर्माने की व्यवस्था हो और ऐसा नियम बनाया जाना चाहिए। जिससे जो यह तय करे कि किसान एमएसपी से लाभकारी पेमेंट तय समय पर मिले और उसके साथ कोई प्राइवेट खरीददार धोखा ना करने पाए।

बलराज कुंडू ने तीनों अध्यादेशों की खामियों पर ध्यान दिलाते हुए साफ कहा कि केंद्र सरकार का हवाला देते हए उनका ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को रद करना समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि इस सदन में जो लोग विधायक चुनकर आये हैं वे 80 प्रतिशत किसान और कृषि कार्यों से जुड़े लोगों की वोट हासिल करके ही यहां पहुंचे हैं। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि हम किसानों के हकों के लिए खड़े हों। इस पर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि बलराज कुंडू की बात पर विचार किया जाएगा।

कोरोना काल में करप्शन के आरोप का अनोखा अंदाज
कांग्रेसी विधायकों ने सरकार पर कोरोना काल के दौरान विभिन्न मामलों में भ्रष्टाचार का आरोप जड़े। इसी के चलते सभी कांग्रेसी अपने चेहरों पर ऐसे मास्क लगाकर पहुंचे थे, जिस पर सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप अंकित थे। पूरे सत्र के दौरान सभी कांग्रेसी विधायकों ने यही मास्क पहने हुए थे।

उधर, कांग्रसी विधायकों ने सत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग की महिला सुपरवाइजरों के तबादले का भी मुद्दा उठाया। विधायकों ने कहा कि इन महिलाओं का तबादला दो से तीन सौ किलोमीटर दूर कर दिया गया है। जो कि अनुचित हैं। उन्हें जल्द रद किया जाए, क्योंकि इससे कर्मचारी बहुत ज्यादा परेशान है।
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