हरियाणा छह बेल्टों में बंटा हुआ है। इन बेल्ट के आधार पर ही सत्ता के समीकरण बनाए व बिगाड़े गए। इनमें जीटी बेल्ट, बांगर, देशवाली, बागड़ी, मेवात-बृज और अहीरवाल बेल्ट शामिल हैं। जीटी और अहीरवाल बेल्ट को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। इस बार भाजपा को अपने ही गढ़ में काफी टक्कर मिल रही है। कांग्रेस का देशवाली व मेवात में दबदबा रहा है। करीब 39 ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। 12 सीटों पर क्षेत्रीय दलों व आप ने मुकाबला बहुकोणीय बना दिया है। छह सीटों पर निर्दलीय व बागियों ने भी समीकरण बिगाड़े हैं। सभी बेल्ट पर अलग-अलग समीकरण हैं। देशवाली बेल्ट पर हुड्डा फैक्टर काम कर रहा है तो अहीरवाल में ओबीसी फैक्टर। एक नजर डालते हैं बेल्ट वार चुनावी समीकरणों पर...
बागड़ बेल्ट : पांच सीटों पर कड़ा मुकाबला
इस बेल्ट में कांग्रेस भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है। 5 पर भाजपा-कांग्रेस में टक्कर है। 1-1 पर इनेलो और हलोपा जंग लड़ रही हैं। 3 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है। यहां कांग्रेस कालांवाली, रतिया, फतेहाबाद और नलवा व भाजपा आदमपुर और भिवानी में खुद को मजबूत मान रही है। सिरसा में हलोपा के गोपाल कांडा और कांग्रेस के गोकुल सेतिया और ऐलनाबाद में इनेलो के अभय चौटाला और कांग्रेस के भरत बेनिवाल में मुख्य मुकाबला है। तोशाम में भाजपा की श्रुति चौधरी व कांग्रेस के अनिरुद्ध चौधरी, लोहारू में जेपी दलाल और कांग्रेस के राजबीर फरटिया, हिसार में सावित्री जिंदल, कांग्रेस के रामनिवास राड़ा व भाजपा के कमल गुप्ता और डबवाली में कांग्रेस के अमित सिहाग, इनेलो के आदित्य चौटाला व जजपा के दिग्जिवज चौटाला के बीच त्रिकोणीय टक्कर है।
जाट बहुल क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर हावी
इनेलो का गढ़ रही इस बेल्ट में बीते दस साल से भाजपा मजबूत स्थिति में है। जाट बहुल क्षेत्र में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या अधिक है। खास बात ये है कि इस बेल्ट पर किसान आंदोलन का खासा असर है। विकास कार्य न होने के साथ फसल का मुआवजा नहीं मिल पाना और कपास की फसल का भी यहां बड़ा मुद्दा है। भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल है। राहुल गांधी ने बरवाला में रैली कर इस इलाके को साधने की कोशिश की है।
चर्चित चेहरे : श्रुति चौधरी, अनिरुद्ध चौधरी, भव्य बिश्नोई, जेपी दलाल, मंत्री कमल गुप्ता, डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा, अनूप धानक, सावित्री जिंदल, अभय चौटाला और दिग्विजय चौटाला
अहीरवाल बेल्ट : पांच सीटों पर सीधा मुकाबला, चार पर प्रतिष्ठा दांव पर...
गुड़गांव में लड़ाई रोचक : चार सीटों अटेली में भाजपा उम्मीदवार आरती राव, पटौदी में बिमला चौधरी, नारनौल में ओम प्रकाश यादव और बादशाहपुर में राव नरबीर सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है। पांच सीटें महेंद्रगढ़, नांगल चौधरी, रेवाड़ी, बावल और कोसली में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। महेंद्रगढ़ में कांग्रेस विधायक राव दान सिंह व भाजपा के कंवर सिंह यादव के बीच, नांगल चौधरी में भाजपा के मंत्री डॉ. अभय यादव व कांग्रेस की मंजू चौधरी, रेवाड़ी में कांग्रेस विधायक चिरंजीव राव व भाजपा विधायक लक्ष्मण यादव, बावल में कांग्रेस के उम्मीदवार व पूर्व मंत्री एमएल रंगा व भाजपा के कृष्ण कुमार और कोसली में भाजपा के अनिल यादव व कांग्रेस के जगदीश यादव के बीच कांटे की टक्कर चल रही है। सोहाना में चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां से भाजपा से तेजपाल तंवर, कांग्रेस के रोहताश खटाना, भाजपा के बागी व जिला परिषद के पूर्व चेयरमैन कल्याण सिंह चौहान व आजाद उम्मीदवार जावेद अहमद मैदान में हैं। दोनों आजाद उम्मीदवार भाजपा व कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा रहे हैं। गुड़गांव में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। गुड़गांव में भाजपा के मुकेश शर्मा, कांग्रेस के मोहित ग्रोवर व भाजपा के बागी नवीन में दिलचस्प लड़ाई देखने को मिल रही है।
चर्चित चेहरे : अटेली से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी आरती, रेवाड़ी से पूर्व मंत्री अजय यादव के बेटे चिरंजीव, महेंद्रगढ़ से पूर्व सीपीएस राव दान सिंह, नांगल चौधरी से मंत्री डॉ. अभय यादव, बादशाहपुर से पूर्व मंत्री राव नरबीर सिंह।
बांगर बेल्ट : जाट वोट लामबंद हैं और किसान आंदोलन का प्रभाव
बांगर में जाट वोटर लामबंद हैं और पंजाब से सटा होने के कारण इलाके में किसान आंदोलन का प्रभाव भी है। यहां इस बार तीसरे दल की भूमिका नहीं दिखती। पिछली बार जजपा इस क्षेत्र में काफी मजबूत थी। चार विधायक चुने गए थे। जजपा का वोट बैंक इस बार कांग्रेस की ओर शिफ्ट हुआ है। यदि जाट व गैर जाट चुनाव हुआ तो भाजपा को फायदा हो सकता है।
चार सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला
5 सीटों जुलाना से कांग्रेस की विनेश फोगाट, सफीदों से सुभाष गांगोली, नरवाना से सतबीर दबलैन, गुहला में देवेंद्र हंस और पुंडरी से सुल्तान जडौला प्रचार में पसीना बहाने के बाद खुद की हवा मान रहे हैं। चार सीटों जींद, कैथल, टोहाना व नारनौंद में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा और उचाना, बरवाला व कलायत में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। कैथल में भाजपा के मौजूदा विधायक लीला राम गुर्जर व कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला, टोहाना में भाजपा के देवेंद्र बबली व कांग्रेस के परमवीर सिंह के बीच, नारनौंद में भाजपा के कैप्टन अभिमन्यु व कांग्रेस के जस्सी पटवाड़ के बीच सीधा मुकाबला है।
चर्चित चेहरे : नारनौंद से कैप्टन अभिमन्यु, जुलाना से विनेश, उचाना कलां से दुष्यंत चौटाला, बृजेंद्र सिंह, आदित्य सुरजेवाला, विकास सहारण, रामपाल माजरा व अनुराग ढांडा
देशवाली बेल्ट : किसान व पहलवान आंदोलन का असर
यहां किसान व पहलवान आंदोलन का असर है। दूसरा इस क्षेत्र के लोगों को फिर से प्रदेश की चौधर का नारा दिया गया है, जिसका असर लोगों में देखा जा सकता है। जातिगत समीकरणों की बात करें तो यहां जाट, सैनी, वैश्य और पंजाबी समाज का वोट बैंक अधिक है। खासकर ये चुनाव भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा की प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं।
तीन सीटें कांग्रेस मान रही सेफ, बाकी पर कड़ी टक्कर
देशवाली की तीन सीटों गढ़ी सांपला किलोई, बेरी व झज्जर को कांग्रेस सेफ मान रही है। कलानौर, रोहतक में भाजपा से चुनाैती मिल रही है। महम में कांग्रेस के बलराम दांगी और निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू के बीच मुकाबला है। भाजपा के दीपक हुड्डा और भाजपा की बागी राधा अहलावत मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में हैं। बहादुरगढ़ में भी हालात इसी प्रकार के हैं। बादली, सोनीपत, गोहाना व खरखौदा में सीधा मुकाबला है। बरौदा में कांग्रेस विधायक इंदुराज नरवाल को कांग्रेस के ही बागी कपूर सिंह नरवाल कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
चर्चित चेहरे : भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, रघुबीर कादियान, गीता भुक्कल, डॉ. अरविंद शर्मा
जीटी बेल्ट : छह सीटों से भाजपा व तीन से कांग्रेस को आस
छह सीटों अंबाला कैंट, यमुनानगर, रादौर, पानीपत ग्रामीण, पानीपत सिटी व घरौंडा से भाजपा को आस है। कांग्रेस साढौरा, नारायणगढ़ व शाहाबाद सीट छोड़ना नहीं चाहती। 12 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस में आमने-सामने और एक-एक सीट पर त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। अंबाला कैंट में कांग्रेस की बागी चित्रा सरवारा ने भाजपा के अनिल विज और कांग्रेस के परविंद्र परी के सामने कड़ी चुनौती पेश की है। पंचकूला में भाजपा के ज्ञान चंद गुप्ता व पूर्व डिप्टी सीएम कांग्रेस उम्मीदवार चंद्रमोहन व कालका में कांग्रेस के प्रदीप चौधरी व भाजपा की शक्ति रानी शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर है।
भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की सेंध
भाजपा का गढ़ रही इस बेल्ट को मजबूत करने के लिए पीएम मोदी ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत इसी क्षेत्र से की। कांग्रेस ने इस बार सधी रणनीति के तहत भाजपा के किले को ध्वस्त करने के लिए पूरा जोर लगाया। राहुल गांधी ने अपनी पहली रैली व रोड शो जीटी बेल्ट से शुरू कर पार्टी के लिए माहौल बनाया। कांग्रेस के इस क्षेत्र में मजबूत होने के पीछे कुछ कारण हैं। इनमें मुख्य रूप से सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, किसान आंदोलन और सरकारी योजनाओं की जटिलताएं हैं। यदि कांग्रेस चुनावी रणनीति कामयाब होती है तो सत्ता तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
चर्चित चेहरे : सीएम नायब सिंह सैनी, पूर्व मंत्री अनिल विज, मंत्री कंवरपाल गुर्जर, असीम गोयल, विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता, मंत्री सुभाष सुधा, पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा, मंत्री महिपाल ढांडा
मेवात-बृज बेल्ट : कांग्रेस को अपने गढ़ से सबसे ज्यादा उम्मीद...पर अध्यक्ष कड़े मुकाबले में फंसे
मेवात बेल्ट में कांग्रेस का दबदबा रहा है और बृज में भाजपा का। मेवात की तीन सीटों नूंह में आफताब अहमद, फिरोजपुर झिरका से मामन खान और पुन्हाना से निवर्तमान विधायक मोहम्मद इलियास के लिए अपना गढ़ बचाना चुनाैती है। फरीदाबाद एनआईटी से नीरज शर्मा, पलवल में पूर्व मंत्री कर्ण दलाल, होडल से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान कांटे के मुकाबले में फंसे हैं। भाजपा में फरीदाबाद में विपुल गोयल, बल्लभगढ़ में मंत्री मूलचंद शर्मा खुद की हवा मान रहे हैं। तिगांव में कांग्रेस के ललित नागर व भाजपा के राजेश नागर के बीच मुकाबला है। फरीदाबाद जिले की बड़खल विधानसभा सीट पर कांग्रेस से पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप के पुत्र विजय प्रताप और भाजपा के धनेश अदलखा के बीच कांटे का मुकाबला है। बल्लभगढ़ में मूलचंद शर्मा को कांग्रेस की बागी शारदा राठौर टक्कर दे रही हैं। पृथला में कांग्रेस के रघुबीर तेवरिया और भाजपा के टेकचंद के बीच मुकाबला है, लेकिन निर्दलीय विधायक नयनपाल रावत मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं।
चर्चित चेहरे : चौधरी उदयभान, मंत्री मूलचंद शर्मा, पूर्व मंत्री कर्ण सिंह दलाल, मामन खान, आफताब अहमद, मोहम्मद इलियास, व विधायक नीरज शर्मा।
तंवर ने भाजपा से कांग्रेस में की वापसी पांच साल में चौथी बार बदल दी पार्टी
पूर्व सांसद अशोक तंवर शुक्रवार को कांग्रेस में औपचारिक रूप से शामिल हो गए। उन्होंने हरियाणा के दलित व पिछड़े वर्गों के मतदाताओं से आह्वान किया कि वे कांग्रेस को बड़ा जनादेश दें, ताकि प्रदेश नंबर एक बन सके। पांच साल में चार दलों में शामिल हो चुके तंवर बृहस्पतिवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ महेंद्रगढ़ में चुनावी मंच पर नजर आए थे। इससे कुछ देर पहले ही उन्होंने भाजपा के लिए प्रचार किया था। तंवर पांच साल पहले पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मतभेदों के चलते कांग्रेस से अलग हो गए थे। वह आप और तृणमूल कांग्रेस में भी रह चुके हैं।