चौधरियों के प्रदेश हरियाणा में राजनीतिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए महिलाओं को ‘घूंघट’ और ‘घर’ की दहलीज लांघने का मौका कम ही मिला। सूबे के इतिहास में अब तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए उसमें महिलाओं की भागेदारी बेहद कम रही। अब तक प्रदेश में चुनाव के दौरान महिलाओं को टिकट देने की औसत दर मात्र 4.06 प्रतिशत है। हरियाणा गठन के बाद सन 1967 से लेकर अब तक प्रदेश में कुल 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इन चुनावों में अब तक सूबे की सभी 90 विधानसभा सीटों पर 13355 प्रत्याशी ताल ठोक चुके हैं।
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मगर विडंबना यह है कि इन प्रत्याशियों में महिलाओं की संख्या केवल 542 ही रही। जबकि 12813 पुरुष प्रत्याशियों मैदान में उतरे थे। भले कोई भी राजनीतिक पार्टी हो, किसी ने भी सूबे में महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ने के ज्यादा मौका ही नहीं दिए। ऐसा नहीं है कि हरियाणा की महिलाओं में नेतृत्व क्षमता की कमी है या वे इसके योग्य नहीं है। देश की प्रशासनिक सेवाएं हो या फिर ओलंपिक सरीखे अन्य अंर्तराष्ट्रीय खेल मुकाबले हरियाणा की छोरियां ने यह साबित किया है कि वे मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से बेहद मजबूत और योग्य हैं।
इसके अलावा राजनीतिक क्षेत्र में भी हरियाणा की जिन महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिला, वे भी सियासी फलक में खूब चमकी हैं। हरियाणा की राजनीतिक पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल के सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने पहली बार खुले मंच ये ऐलान किया है कि उनका दल इस बार हरियाणा के विधानसभा चुनाव में कुल नब्बे सीटों पर 33 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देगा। बहरहाल, अब देखना यह है कि हरियाणा के इस 13वें विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल महिलाओं को सत्ता में आने के लिए कितना मौका देते हैं।
हरियाणा में पहला विधानसभा चुनाव सन 1967 में हुआ था। इस चुनाव में 463 पुरुष प्रत्याशी थे, जबकि महिला प्रत्याशियों की संख्या केवल 8 थी। इसी तरह सन 1968 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशियों की संख्या 386 व महिलाओं की संख्या 12, सन 1972 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशी 371 व महिला प्रत्याशी 13, सन 1977 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशी 651 और महिला प्रत्याशी 20, सन 1982 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशी 1068 और महिला प्रत्याशी 27, सन 1987 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशी 1287 और महिला प्रत्याशी 35, वर्ष 1991 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशी 1844 व महिला प्रत्याशी 41, सन 1996 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशी 2515 व महिला प्रत्याशी 93, वर्ष 2000 में पुरुष प्रत्याशी 916 व महिला प्रत्याशी 49, वर्ष 2005 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशी 923 व महिला प्रत्याशी 60, वर्ष 2009 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशी 1154 व महिला प्रत्याशी 68 व वर्ष 2014 के चुनाव में पुरुष प्रत्याशी 1235 व महिला प्रत्याशी 116 थे।
सियासी अर्श पर चमकी ये नेत्रियां
हरियाणा की कुछ नेत्रियां ऐसी भी हैं, जिन्होंने देश ही नहीं विदेश में भी अपनी पहचान बनाई। इसमें बड़ा नाम देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का है। इनके अलावा देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी भी हरियाणा की थी। इनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा, पुडुचेरी की उपराज्यपाल चंद्रावती, पूर्व सांसद श्रुति चौधरी, डॉ. सुधा यादव, कैलाशो सैनी, पूर्व मंत्री किरण चौधरी भी हरियाणा से ही ताल्लुक रखती हैं।
महिलाओं को पूरा हक देने की आवाजें तो देशभर में बुलंद होती रहती हैं। मगर जब बात ताकत सांझा करने की आती है, तो महिलाओं को हाशिये पर कर दिया जाता है। महिलाओं की योग्यता पर उठने वाले सवालों का जबाव तो महिलाओं की कामयाबी ने खुद ही दे दिया है। सत्ता में जो लोग काबिज है, वे इस जवाबदेही से बच नहीं सकते कि किस तरह योजनाबद्ध तरीके से महिलाओं को ‘पॉवर स्ट्रेक्चर’ से दूर रखा जा रहा है। सत्ता, जहां देश के लिए नीतियां बनती हैं और विकास की दिशा तय होती है, उसमें महिलाओं की पर्याप्त भागेदारी होनी चाहिए। राजनीतिक संगठनों को राजनीति में आगे आने का पूरा मौका महिलाओं को देना चाहिए । - जगमती सांगवान, महिला चिंतक, हरियाणा