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हरियाणा विस चुनावः भाजपा और कांग्रेस में होगी सीधी टक्कर, विपक्षी दल इनेलो टूटकर बिखर गया

प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 22 Sep 2019 09:57 AM IST
हरियाणा के तीनों दिग्गज नेता एक साथ - फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा में सत्ता के लिए संघर्ष कर रहे राजनीतिक दलों के लिए विधानसभा चुनाव 2019 प्रतिष्ठा बचाने की लड़ाई है। भाजपा 75 सीटें जीतने का सपना संजोये हुए है और विपक्ष इसे रोकने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। देर से चौधर मिलने के बाद चुनाव समर में कूदे पूर्व सीएम हुड्डा के सामने भी हरियाणा जीतने की चुनौती है। इस बार भी मुकाबला सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है।

प्रदेश में छह महीने पहले मुख्य विपक्षी दल कहा जाने वाला इनेलो अब टूट कर बिखर चुका है। ताऊ देवीलाल के बनाए इनेलो में अभया चौटाला को मिलाकर कुल तीन विधायक बचे हैं, जबकि 2014 में इस पार्टी ने 19 सीटें जीती थीं। परिवार में विघटन के बाद अलग हुई जननायक जनता पार्टी के लिए यह पहना चुनाव होगा और देखना यह होगा कि पार्टी किस तरह से प्रदर्शन करती है।
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कुछ ऐसी है सभी दलों की स्थिति

भाजपा- 75 का लक्ष्य: भाजपा के लिए यह दूसरा चुनाव होगा, जब पार्टी अपने दम पर सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। भाजपा भ्रष्टाचार और नौकरियों में बंदरबाट का मुद्दा जनता के बीच ले जाकर जीत हासिल करना चाह रही है। सीएम मनोहर लाल जीत के लिए यह आधार बना रहे हैं कि पर्ची खर्ची की सरकार को अलविदा कहकर इस बार 75 सीटों वाली सरकार बनाकर दिखानी है।

कांग्रेस सैलजा के सहारे: पांच साल पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हुड्डा खेमे की बात मानकर अंततः आलाकमान ने चुनाव की कमान उनके हाथ में दे दी है। कभी अपनी विरोधी रही कुमारी सैलजा के साथ कंधे से कंधा मिलकर चल रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा का मानना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव दोनों अलग-अलग मुद्दे होते हैं।

आप दिल्ली के वादों पर वोट मांगेगी: दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है। उसके बावजूद आप पड़ोसी राज्य हरियाणा में खाता नहीं खोल पाई है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद और राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता दिन रात एक किए हुए हैं। पार्टी दिल्ली में किए गए विकास की तस्वीर दिखाकर हरियाणा में वोट मांगेगी।

हाथी नहीं बनता किसी का साथी: बसपा का हाथी किसी का भी साथी नहीं बना पाया है। लोकसभा चुनाव में इनेलो का चश्मा कुछ दिन चढ़ाने के बाद गठबंधन चुनाव से पहले ही टूटकर बिखर गया। इसके बाद लोक सुरक्षा पार्टी और जेजेपी के साथ गठबंधन किया, जो जल्दी टूट गया। अब बसपा सभी सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है।

दिखाना होगा जेजेपी को दम: जननायक जनता पार्टी के लिए यह पहला चुनाव है और प्रतिष्ठा का सवाल है। चौटाला परिवार से अलग होने के बाद पार्टी को बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपनी साख बचानी होगी। पार्टी के लिए अच्छी खबर ये है कि अजय चौटाला पैरोल पर बाहर आ रहे हैं, जिनकी प्रदेश में अच्छी पैठ है।
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