लंबे समय तक कांग्रेस से दूर रहने के बाद भजनलाल का परिवार एक बार फिर से कांग्रेस की पिच पर बैटिंग करने के लिए तैयार है। कांग्रेस ने भी समय की नजाकत को भांपते हुए पुराने गिले शिकवे दूर कर स्वर्गीय भजनलाल के दोनों बेटों कुलदीप और चंद्रमोहन को गले लगा लिया है।
दोनों भाइयों को टिकट देकर कांग्रेस आदमपुर और पंचकूला सीट हथियाना चाह रही है। जबकि कुलदीप बिश्रोई की धर्मपत्नी रेणुका बिश्रोई इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। टिकट वितरण के बाद से ही आदमपुर और पंचकूला में मजमा लगना शुरू हो गया है।
कांग्रेस सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे चंद्रमोहन की पंचूकला स्थित कोठी पर एक बार फिर से रौनक लौट आई है। पिछले दस साल से यहां सन्नाटा रहता था। इक्का-दुक्का लोग ही चंद्रमोहन की कोठी पर उनसे मिलने आया जाया करते थे, लेकिन आज घर के बार गाड़ियों की लंबी लाइन है।
पूर्व सीएम भजन लाल मुख्यमंत्री रहते हुए इसी कोठी से अपनी सियासत चलाया करते थे। उनके राजनीति से रिटायर होने के बाद उनकी विरासत चंद्रमोहन ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर संभाली, लेकिन परिस्थतियों में आए बदलाव में यह सिलसिला ज्यादा दिन तक नहीं चला और उन्हें उपमुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। जिसके बाद पंचकूला सीट से चंद्रमोहन और उनके परिवार की दूरी बन गई।
मैदान खाली हुआ तो कांग्रेस ने यहां से अंबाला शहर के विधायक डीके बंसल को मैदान में उतारा और बंसल ने जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में भाजपा लहर चली और ज्ञान चंद गुप्ता मैदान में उतरे। जीत का दामन थाम कर गुप्ता विधानसभा तक पहुंचे और सीएम मनोहरलाल ने उन्हें चीफ व्हिप बना कर सम्मान से नवाजा।
कांग्रेस ने अपने पुराने सिपहसलार को भले ही सियासी मजबूरी के चलते उतारा है, लेकिन शहर के कांग्रेसियों में इस बात का जोश है कि चंद्रमोहन के आने से शहर में कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। यही कारण था कि चंद्रमोहन के चाहने वालों का मजमा उनकी कोठी पर लगना शुरू हो गया था। जिसमें उनके पुराने करीबी शशि शर्मा, रविंद्र रावल, अनिल पंगोत्रा सहित अन्य लोग शामिल थे।