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हरियाणा में तीसरी बार भाजपा सरकार: चला मोदी का मैजिक या सीएम चेहरा बदलने का फायदा... जानें जीत के पांच कारण

Tue, 08 Oct 2024 02:04 PM IST
निवेदिता वर्मा डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़

सार

हरियाणा में पांच अक्तूबर को मतदान हुआ था। उसी दिन आए एग्जिट पोल में कांग्रेस को बढ़त मिली। उत्साहित कांग्रेसियों ने सरकार बनाने के दावे तक पेश करने शुरू कर दिए। आठ अक्तूबर को शुरुआती रुझान कांग्रेस के पक्ष में आए लेकिन बाद में हालात बदल गए। 
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हरियाणा चुनाव में भाजपा की जीत के कारण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा की धरती ने आज इतिहास रच दिया है। किसी भी दल को तीसरा माैका न देने वाले हरियाणा ने भाजपा को दोबारा सत्ता की चाबी साैंप दी है। एग्जिट पोल और शुरुआती रुझानों में आगे रही कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। वहीं भाजपा जश्न मनाने में जुट गई है। 
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प्रचार में पिछड़ गई थी कांग्रेस

हरियाणा विधानसभा चुनावों को लेकर टिकट वितरण से पहले प्रचार में कांग्रेस भाजपा से पिछड़ती दिखी। जब मुख्यमंत्री नायब सैनी के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने प्रचार शुरू कर दिया था तब कांग्रेस के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उदयभान, कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला टिकटों को लेकर दिल्ली में ही उलझे हुए थे। इसके अलावा भी कई ऐसे फैक्टर रहे जिन्होंने भाजपा की राह आसान की।   

भाजपा का आक्रामक प्रचार

चुनावों की घोषणा से पहले ही भाजपा चुनावी मूड में आ गई थी। आचार संहिता से पहले भाजपा ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं। न केवल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अलग-अलग हलकों में जाकर प्रचार को धार दी, बल्कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल व कानून मंत्री मेघवाल भी पहुंचे। गृह मंत्री अमित शाह लगातार अपडेट लेते रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर को कुरुक्षेत्र में रैली कर प्रचार का शंखनाद किया। 

सीएम चेहरा बदला

भाजपा ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अपने सीएम को बदल दिया था। दरअसल मनोहर लाल के खिलाफ एंटी इन्कंबेंसी को भांपते हुए शीर्ष नेतृत्व ने ओबीसी चेहरे नायब सैनी को सीएम पद पर बिठाया। इसके बाद मनोहर लाल को करनाल से लोकसभा चुनाव लड़वाया गया। सांसद बनने पर उन्हें केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया। 

 

नए उम्मीदवारों को टिकट

भाजपा ने इस बार ऐसे ही उम्मीदवारों पर दांव खेला, जिनके जीतने के चांस बेहद ज्यादा थे। पार्टी ने इस बार लगभग 30 नए चेहरों को मैदान में उतारा। कद्दावर नेता रामबिलास शर्मा तक का टिकट काट दिया गया।
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बागियों को अहमियत नहीं 

भाजपा ने इस बार दबाव में अाए बिना उम्मीदवार चुने। इससे कई नेता नाराज भी हुए। कई पार्टी से बागी होकर मैदान में भी आए। इनमें सबसे प्रमुख नाम था सांसद नवीन जिंदल की मां सावित्री जिंदल का। वे हिसार से निर्दलीय उतरी लेकिन पार्टी ने उनके सामने अपना प्रत्याशी खड़ा किया। 
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