कैप्टन अमरिंदर सिंह और हरीश रावत।
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केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा में पारित संशोधन विधेयकों की तरह ही अन्य कांग्रेस शासित राज्य भी जल्द ही अपनी विधान सभाओं में ऐसे विधेयक पारित करेंगे। यह जानकारी बुधवार को कांग्रेस के पंजाब प्रभारी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दी।
पंजाब भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हरीश रावत ने कहा कि राजस्थान सरकार ने विधेयक लाने का एलान भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अब यह महसूस करने लगी हैं कि केंद्र के कानून उनके राज्यों में किसानी को खत्म कर देंगे। इनका बुरा असर पीडीएस प्रणाली पर भी पड़ेगा।
इस तरह कानून बनाना संघीय व्यवस्था को भी ध्वस्त करने वाला है। रावत ने कहा कि फसली विविधता के लिए कानून बनाया जाना चाहिए था लेकिन केंद्र की मंशा कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने की है ताकि वे इस क्षेत्र पर भी अपना कब्जा जमा सकें।
रावत ने कहा कि राहुल गांधी भी यह साफ कर चुके हैं कि ये तीनों कानून गरीब के पक्ष में नहीं हैं। केवल अडाणी-अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए हैं। इससे अनाज पैदा करने वाले गरीब को भी मारने की तैयारी है।
सिद्धू को एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपेगी कांग्रेस
नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर पूछे गए सवाल पर हरीश रावत ने कहा कि वे पार्टी के जिम्मेदार और वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने सदन में भी तीनों संशोधन विधेयकों को पारित करवाने में अहम भूमिका निभाई है। पार्टी उनके अनुभव और उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें एक से अधिक जिम्मेदारियां भी सौंपेगी।