विधानसभा अध्यक्ष ने कहा-मामन खान का विवादित बयान सदन की कार्यवाही का हिस्सा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। विधानसभा स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने बताया कि धज्जियां असंसदीय शब्द नहीं है। यह शब्द विधानसभा की कार्यवाही से नहीं हटेगा। सत्र में मंत्री संदीप सिंह के इस्तीफे की मांग के दौरान हुई बहस में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा था कि पुराने मामले उठेंगे तो आपकी धज्जियां उड़ जाएंगी। इस शब्द पर विपक्ष नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आपत्ति दर्ज करवाई थी। वहीं, गुप्ता ने कहा कि मामन खान का विवादित बयान अब भी सदन की कार्यवाही का हिस्सा है। उसे नहीं हटाया गया है। मोनू मानेसर के मुद्दे पर मामन खान ने कहा था यदि मोनू मेवात में दिखा तो उसे प्याज की तरह फोड़ देंगे। वहीं, यह सत्र अब तक के अगस्त में होने वाले सभी सत्रों में लंबा रहा है। इस बार मानसून सत्र में 113.88 फीसदी काम हुआ है। इस दौरान कुल 19 घंटे 36 मिनट कार्यवाही चली, जिसमें 89 सदस्यों ने भाग लिया।
शून्यकाल में भाजपा विधायकों को सबसे ज्यादा समय मिला
सत्र के पहले और अंतिम दिन शून्यकाल रहा, जिसमें पहले दिन 17 विधायकों ने 58 मिनट तक अपनी बात रखी। अंतिम दिन शून्यकाल 2 घंटे 26 मिनट चला, जिसमें 43 विधायकों को बोलने का अवसर मिला। इस प्रकार शून्यकाल में कुल 60 सदस्यों ने भाग लिया, जिनमें भाजपा के 24, कांग्रेस के 24, जजपा के 7, इनेलो का एक और 4 निर्दलीय विधायक शामिल रहे। इस दौरान भाजपा विधायकों को एक घंटा 25 मिनट, जजपा को 23 मिनट, कांग्रेस को एक घंटा 16 मिनट, इनेलो को 4 मिनट, निर्दलीय को 16 मिनट का समय दिया गया। सत्र की जानकारी देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने बताया कि मानसून सत्र में कुल 9 विधेयक पारित किए गए। इन पर कुल 2 घंटे 13 मिनट चर्चा हुई, जिसमें से एक घंटा 26 मिनट कांग्रेस के विधायकों ने बात रखी। भाजपा ने 36 मिनट तथा जजपा ने 11 मिनट का समय लिया। सत्तापक्ष को कुल 47 मिनट का समय दिया गया। इस दौरान कांग्रेस के 8 तथा सत्तापक्ष की ओर से मंत्रियों समेत 7 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।
50 ध्यानाकर्षण सूचनाएं प्राप्त हुईं
स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने बताया कि 50 ध्यानाकर्षण सूचनाएं प्राप्त हुईं। इनमें 16 ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इसी प्रकार स्थगन प्रस्ताव के लिए 4 सूचनाएं प्राप्त हुई थीं। इनमें से 2 को ध्यानाकर्षण प्रस्तावों में तब्दील कर दिया गया, एक अस्वीकृत किया गया तथा एक टिप्पणी के लिए भेजा गया है। एक गैर सरकारी प्रस्ताव भी आया था, जिसे अस्वीकृत कर दिया गया। अल्प अवधि चर्चा के लिए 2 प्रस्ताव मिले थे, इन्हें ध्यानाकर्षण प्रस्तावों में परिवर्तित कर 25 और 28 अगस्त को चर्चा करवाई गई। विधान सभा सचिवालय को एक प्राइवेट सदस्य विधेयक भी प्राप्त हुआ था, जिसे आवश्यक कार्यवाही के लिए विधि एवं विधायी विभाग के माध्यम से सरकार के पास भेज दिया गया है। नियम 84 के तहत चर्चा के लिए भी एक प्रस्ताव आया था, जिसे अस्वीकृत कर दिया गया। तीन दिन में 1076 दर्शकों ने सत्र की कार्यवाही देखी।