सीता रानी-85 साल, संतोष-72 साल, राज रानी-70 साल, महेंदरो-65 साल ...। ये वो उम्रदराज महिलाएं हैं, जिन्होंने आज तक मल्टीप्लेक्स तो क्या सिनेमाघर तक का मुंह नहीं देखा था। लेकिन, गुरमीत राम रहीम की फिल्म एमएसजी द मैसेंजर उन्हें शुक्रवार को सिनेमा घर तक खींच लाई।
उन्हें सिनेमा से कम और फिल्म में बाबा को देखकर ज्यादा खुशी थी। पंजाब के मलोट से आई सीता रानी तो फिल्म देखने के बाद बाहर बैठकर भी हाथ जोड़कर बाबा का ही गुणगान कर रही थीं। जीकरपुर से आई महेंदरो ने बताया कि वह जीवन में पहली बार सिनेमा घर तक आई हैं।
बलटाना से आईं राजरानी और संतोष सहारे के बल पर कदम भी उठा पाती हैं, लेकिन डेरा प्रमुख को परदे पर देखने के लिए अपने परिवार के साथ सिनेमा घर तक आ पहुंचीं। सबने मनीमाजरा स्थित फन रिपब्लिक में फिल्म का पहला शो देखा और बाद में भी बाबा का ही गुणगान करतीं नजर आईं।
मल्टीप्लेक्स के बाहर गाए बाबा के गीत
फन रिपब्लिक में हिमाचल प्रदेश के पोंटा साहिब से आई लड़कियां अनीता, नेहा, सुनीता, रीतू, अंजू, बिमला, मानवी, अश्मा, उनके अन्य परिवार के सदस्य दीपक, सुमेश आदि ने भी फिल्म देखी और बाहर आकर नाच गाकर खुशी का इजहार किया। उन्होंने फिल्म के गाने जीएंगे मरेंगे देश के लिए... गाने भी गए।
इन सभी ने एमएसजी और बाबा की तस्वीर लगी टी-शर्ट भी पहन रखी थी। वहीं, पहला शो देखकर बाहर निकलीं जीकरपुर निवासी महिला कमलजीत, पंचकूला के गुरदयाल, कसौली के राकेश ने बताया कि यह फिल्म पूरे समाज को नशा मुक्ति का संदेश देती है।
एफआर के बाहर 100 जवानों की तैनाती
शुक्रवार सुबह 9 बजे फिल्म का पहला शो शुरू होने से पहले पुलिस ने फन रिपब्लिक की घेराबंदी कर रखी थी। 100 पुलिस जवानों के साथ-साथ दो पुलिस इंस्पेक्टर, एक डीएसपी भी तैनात रहे।
सिनेमा घर के आसपास की सड़कों पर पुलिस ने बैरिकेड लगाकर आने-जाने वाहनों पर नजर रखी। पुलिस किसी को भी सिनेमा घर के पास ज्यादा देर ठहरने नहीं देती थी, चाहे वे सिनेमा देखकर निकले बाबा के भक्त ही क्यों न हों।