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गुड़िया हत्याकांड: डीएसपी के फोन की रिकाॅर्डिंग बनी फैसले की वजह... थाने के संतरी की गवाही भी रही अहम

Sun, 19 Jan 2025 01:59 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो हरीश कोचर, संवाद, चंडीगढ़

सार

शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की स्टूडेंट 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। मामले में एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया, जिनमें नेपाली युवक सूरज भी शामिल था। कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई।
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अईजी जैदी को ले जाते पुलिसकर्मी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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शिमला के बहुचर्चित गुड़िया हत्याकांड में हिमाचल के आईपीएस आईजी जहूर हैदर जैदी सहित आठ पुलिस कर्मियों को दोषी करार देने में कोटखाई थाने के संतरी कांस्टेबल दिनेश की गवाही सबसे अहम साबित हुई। 

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संतरी ने ही थाने में पुलिस कर्मियों की पिटाई से युवक सूरज की मौत होने की घटना का खुलासा किया था जिसकी रिकार्डिंग डीएसपी मनोज जोशी के मोबाइल में सेव हो रखी थी। यही रिकार्डिंग इस मामले का सबसे पुख्ता सुबूत भी बनी। मामले में दोनों पक्षों के 100 से अधिक गवाह थे जबकि सीबीआई ने मामले को साबित करने के लिए कोर्ट में 52 गवाहों की गवाही करवाई थी।

गुड़िया हत्याकांड की जांच के लिए बनी एसआईटी के इंचार्ज थे जैदी

दरअसल गुड़ि़या हत्याकांड में जांच के लिए शिमला के आईजी जहूर हैदर जैदी के नेतृत्व में जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। इस एसआईटीम में डीएसपी मनोज जोशी, स्टेशन हाउस ऑफिसर सब इंस्पेक्टर राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, हेड कांस्टेबल मोहन लाल, सूरत सिंह, रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रंजीत सतेता भी शामिल थे।

इस जांच टीम ने नेपाल निवासी युवक सूरज को हिरासत में लिया और रात के समय लॉकअप में उसे नाबालिग बच्ची का दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने का इल्जाम कबूल करने के लिए कहा। लेकिन सूरज ने यह गुनाह कबूल नहीं किया जिसके चलते पुलिस कर्मियों ने उसकी पूरी रात खूब पिटाई की। उसके शरीर पर काफी चोटें आई जिसके चलते उसकी थाने के लॉकअप में ही मौत हो गई थी। सब इंस्पेक्टर राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, हेड कांस्टेबल मोहन लाल, सूरत सिंह, रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रंजीत सतेता ने सूरज की पिटाई की थी।

डीएसपी ने आलाधिकारियों से छिपाई सूरज के मौत की खबर

कोटखाई थाने के संतरी ने सूरज की मौत होने की खबर फोन पर रात में ही डीएसपी मनोज जोशी को दी। डीएसपी के फोन में संतरी दिनेश की सारी बात रिकॉर्ड हो गई। लेकिन डीएसपी ने आलाधिकारियों तक इस मामले की सूचना ही नहीं दी और अपने स्तर पर ही इस मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। बाद में जब यह मामला सीबीआई के पास पहुंचा तो इस मामले की जांच करने वाली एसआईटी के सभी सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किया था। सीबीआई ने संतरी दिनेश के बयान दर्ज किए जिसके बाद जांच टीम ने सबसे पहले डीएसपी मनोज जोशी का मोबाइल कब्जे में लिया। सीबीआई जांच टीम को डीएसपी के मोबाइल से संतरी कांस्टेबल की हत्या की सूचना देने वाली रिकार्डिंग मिल गई जिसके जांच टीम ने ट्रायल के दौरान कोर्ट में पेश किया। साथ ही संतरी दिनेश की गवाही भी सबसे अहम साबित हुई।
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कोर्ट ने इस तरह सुनाया अपना फैसला

कोर्ट ने आरोपी नंबर-9 एसपी (दंडूब वांगियाल नेगी उर्फ डी.डब्ल्यू. नेगी) को उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर उसके जमानत बांड निरस्त कर दिए। आरोपी संख्या एक से आठ तक सभी को आईपीसी एक्ट 120-बी, 302 को 120-बी, 330 को 120-बी, 348 को 120-बी, 195 को 120-बी, 196 को 120-बी, 218 को 120-बी और 201 को 120-बी के साथ दोषी ठहराया गया है।

कोर्ट का फैसला आते ही रोने लगे दोषी पुलिस कर्मियों के परिजन

इस मामले में नामजद सभी आरोपी अपने परिजनों के साथ कोर्ट में पहुंचे थे। शनिवार दोपहर में आरोपियों को जैसे ही दोषी करार दिया गया तो कोर्ट के बाहर हड़कंप मच गया। इसके बाद सीबीआई कोर्ट के बाहर अतिरिक्त पुलिस फोर्स को तैनात किया गया और कोर्ट द्वारा फैसला सुनाने के तुरंत बाद दोषियों को हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद सभी दोषियों के परिजन उन्हें गले लिपट-लिपट कर कोर्ट के बाहर ही रोने लग गए।
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