चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सैयद जहूर हैदर जैदी को चंडीगढ़ सीबीआई अदालत से करारा झटका लगा है। उन्होंने 20 अगस्त 2024 से 15 सितंबर 2024 तक मैड्रिड (स्पेन) जाने के लिए परमिशन देने और अपने पासपोर्ट को रिन्यू करने के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी (शिमला) को निर्देश देने को लेकर याचिका दायर की थी लेकिन सीबीआई अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। जैदी शिमला जिले के कोटखाई में जुलाई 2017 में गुड़िया मर्डर मामले में गिरफ्तार आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में आरोपी हैं। बता दें कि शिमला जिले के कोटखाई में 4 जुलाई, 2017 को 16 वर्षीय एक छात्रा स्कूल से लौटते वक्त लापता हो गई थी। 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में छात्रा का शव निर्वस्त्र हालत में मिला। पुलिस ने जांच में पाया कि छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी। इस मामले की जांच के लिए शिमला के तत्कालीन आईजी सैयद जहूर हैदर जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने इस मामले में एक स्थानीय युवक सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें से एक नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई की जांच में पता लगा कि आरोपी सूरज की मौत पूछताछ के दौरान पुलिस प्रताड़ना के कारण हुई थी। इसके आधार पर सीबीआई ने आईजी जैदी सहित मामले से जुड़े नौ अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या की धारा 302, सुबूत खुर्द-बुर्द करने की धारा 201 सहित अन्य कई संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। वर्ष 2017 में इस मामले को शिमला जिला अदालत से चंडीगढ़ सीबीआई अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था और यह मामला अभी विचाराधीन है। मामले में नामजद आईजी जैदी को हिमाचल प्रदेश सरकार ने 15 जनवरी, 2020 को सस्पेंड कर दिया था और वर्ष 2023 में उन्हें करीब 3 साल बाद बहाल किया गया था।
आईजी सैयद जहूर हैदर जैदी ने याचिका में कहा था कि उसके बेटे को 15 महीने की अवधि के मास्टर इन मैनेजमेंट (अंग्रेजी) करने के लिए सितंबर 2024 में आईई यूनिवर्सिटी मैड्रिड स्पेन में दाखिला मिला है। अपने बेटे के एडमिशन की औपचारिकताएं पूरी करने और उसके रहने की व्यवस्था करने के लिए उसे बेटे के साथ 20 अगस्त 2024 से 15 सितंबर 2024 तक मैड्रिड, स्पेन जाना है। इसके अलावा उसका पासपोर्ट 21-09-2017 को समाप्त हो गया है और उसे भी रिन्यू करना है। कहा कि वह नियमित रूप से इस मामले की सुनवाई में शामिल हो रहा है और कभी अनुपस्थित नहीं रहा। वह समाज से जुड़ा हुआ है और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश पुलिस में जिम्मेदारी वाले अहम पद पर है।
सीबीआई जांच टीम की दलीलों पर खारिज हुई याचिका
इस याचिका पर सीबीआई की जांच टीम ने सीबीआई कोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि आरोपी की ओर से विदेश जाने और पासपोर्ट रिन्यूवल के लिए पहले भी इसी तरह की याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी जो कि 9 दिसम्बर 2019 को खारिज हो गई थी। जांच टीम ने दावा किया कि मामला गवाही के लिए अंतिम चरण में है और जांच अधिकारी से पूछताछ चल रही है। ऐसे में अगर आरोपी विदेश चला गया तो वह केस के खत्म होने से बचने के लिए फरार भी हो सकता है, क्योंकि उसके खिलाफ जांच टीम के पास काफी अहम सबूत हैं। जांच टीम ने कहा कि आरोपी आईजी को करीब चार साल बाद जब जमानत मिली थी तो उसने उस समय करार किया था कि वह मुकदमा खत्म नहीं होने तक हिमाचल प्रदेश में प्रवेश नहीं करेगा और लखनऊ का मूल निवासी होने के नाते वह लखनऊ में ही रहेगा लेकिन अब वह अदालत के ही आदेशों की उल्लंघना कर रहा है। दलीलें सुनने के बाद सीबीआई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और आदेशों में लिखा कि मामला सुनवाई के महत्वपूर्ण चरण में है। मामला पुराना और गंभीर प्रकृति का है, इसलिए बाहर जाने की परमिशन दी नहीं जा सकती है।