एक जनवरी 2019 से चंडीगढ़वासी अपना बागवानी (ग्रीन) वेस्ट न तो गारबेज कलेक्टर को देगा और न ही इधर-उधर फेंकेगा। ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ग्रीन वेस्ट को सूखे और गीले कचरे में मिक्स करके डस्टबिन में डालने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जाएगी। शहर में प्रतिदिन 130 टन बागवानी वेस्ट निकलता है, जो कि नए साल से डड्डूमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड और गारबेज प्लांट प्रोसेस के लिए नहीं जाएगा। कमिश्नर केके यादव ने शहर की 400 ग्रीन बेल्ट्स में पिट (गड्ढे) बनाने के निर्देश दिए हैं, जहां पर ग्रीन वेस्ट डाला जाएगा और इससे खाद बनाई जाएगी।
इस समय 35 ग्रीन बेल्ट्स में इस तरह के पिट्स बनाए गए हैं। एक ग्रीन बेल्ट में दो-दो पिट बनाए जाएंगे। इस पिट में बनने वाली खाद लोगों को नो प्रोफिट नो लास पर बेची जाएगी। खाद बेचकर नगर निगम को कमाई भी होगी। इस समय शहर का सारा ग्रीन वेस्ट डंपिंग ग्राउंड और डड्डूमाजरा स्थित गारबेज प्लांट में प्रोसेस के लिए जाता है। इससे डंपिंग ग्राउंड में कचरे के पहाड़ बन रहे हैं। नगर निगम कमिश्नर केके यादव के अनुसार शहर में हर दिन 540 टन कचरा निकल रहा है, जिसमें से 130 टन ग्रीन वेस्ट के अलावा 100 से 120 टन मलबे का वेस्ट निकलता है।
इसके अलावा अन्य तरह का कचरा निकल रहा है। मलबे को प्रोसेस करने के लिए प्लांट अलग से औद्योगिक क्षेत्र में लगाया जा रहा है। कमिश्नर का कहना है कि ऐसा होने पर गारबेज प्लांट और डंपिंग ग्राउंड जाने वाले कचरे की मात्रा भी कम हो जाएगी।
इस तरह से निगम लेगा ग्रीन वेस्ट
नगर निगम कमिश्नर केके यादव का कहना है कि लोगों से ग्रीन वेस्ट लेने के लिए हर सेक्टर में एक ट्राली सप्ताह में खड़ी कर दी जाएगी। लोग ग्रीन वेस्ट लाकर ट्राली में डाल देंगे। उसके बाद यह वेस्ट पार्कों में बने पिट्स में खाद बनाने केलिए डाल दिया जाएगा।
चार सेक्टरों में शुरू होगा सेग्रिगेशन
स्मार्ट सिटी के तहत शहर के चार सेक्टरों में सूखा और गीला कचरा इकट्ठा करने का सिस्टम शुरू करने का प्लान बनाया गया है। यह प्लान भी जनवरी माह से ही लागू होगा। इसके तहत सेक्टर-17, 22, 35 और 43 में सूखे और गीले कचरे का सेग्रिग्रेशन किया जाएगा। इस योजना के विरोध में अभी से डोर-टु-डोर गारबेज कलेक्शन कमेटी आ गई है, जिन्होंने दो दिन से नगर निगम कार्यालय के बाहर धरना दे रखा है।
अधिकारियों ने प्रस्ताव तैयार किया है कि वह सेग्रिगेशन के लिए किस तरह का माडल अपनाना चाहते हैं क्योंकि अगले स्वच्छ सर्वेक्षण में 7 रेटिंग के लिए सेग्रिगेशन शत-प्रतिशत होनी जरूरी है। इस माह विजयवाडा, इंदौर और मैसूर से पार्षद स्टडी टूर कर आए हैं और यहां पर कैसे सेग्रिगेशन होता है, इससे सभी पार्षद प्रभावित हैं। पार्षदों के स्टडी टूर की रिपोर्ट भी सदन में चर्चा के लिए आ रही है। स्मार्ट सिटी के सीईओ और नगर निगम कमिश्नर का कहना है कि 4 माह बाद जिन सेक्टरों में सेग्रिगेशन शुरू किया जाएगा, वह गाड़ियां सरकारी होंगी। ई रिक्शा का प्रयोग किया जाएगा। 500 आबादी पर एक गाड़ी उपलब्ध करवाई जाएगी।