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Chandigarh News: 3000 शिल्प प्रशिक्षकों की भर्ती को हरी झंडी, योग्यता में राहत के खिलाफ याचिका खारिज

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-शिक्षा के क्षेत्र में पूरे देश में एक प्रकार के मानक तय करने का हाईकोर्ट ने दिया सुझाव
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-भर्ती में एक वर्ष के सीआईटीएस के कोर्स की अनिवार्यता की शर्त की गई थी समाप्त

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में शिल्प प्रशिक्षकों के 3000 पदों पर की जा रही भर्ती का रास्ता साफ करते हुए शिल्प प्रशिक्षक प्रशिक्षण योजना (सीआईटीएस) के एक वर्ष के कोर्स की अनिवार्यता को खत्म करने के हरियाणा सरकार के निर्णय पर मोहर लगा दी है। भर्ती को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने के साथ ही अब भर्ती पूरी होने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने जुलाई 2019 में विज्ञापन जारी कर आईटीआई के लिए 3000 से अधिक शिल्प प्रशिक्षक पद के लिए आवेदन मांगे थे। विज्ञापन में योग्यता मानकों में ढील देते हुए उन उम्मीदवारों को भी आवेदन की छूट दे दी जिनके पास सीआईटीएस प्रमाण पत्र नहीं थे।
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याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि केंद्र सरकार ने शिल्प प्रशिक्षकों की भर्ती के लिए सीआईटीएस कोर्स को अनिवार्य किया है ताकि एक समान, मानकीकृत और व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जा सके। याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील यह थी कि केंद्र सरकार के सीआईटीएस को अनिवार्य करने के बाद हरियाणा सरकार को इसमें छूट देने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सीआईटीएस केंद्रित पाठ्यक्रम है और विभिन्न राज्यों के सभी व्यक्तियों से उक्त प्रशिक्षण योजना में शामिल होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। हालांकि, पीठ ने ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए योग्यता में एकरूपता का सुझाव दिया और कहा कि शिक्षा चाहे वह तकनीकी हो या व्यावसायिक पूरे भारत में एक ही स्तर का मानक बनाए रखा जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी उम्मीदवार को किसी भी राज्य में रोजगार पाने का अधिकार है, योग्यताओं की अनिवार्यता सभी राज्यों में सभी छात्रों को शिक्षा का एक समान स्तर प्रदान करने के लिए है। ऐसे में सरकार कदम उठाए ताकि भविष्य में शिल्प प्रशिक्षक प्रशिक्षण योजना (सीआईटीएस) के तहत प्रशिक्षित उम्मीदवारों का ही शिल्प प्रशिक्षकों के पद के लिए चयन किया जाए।
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