-उप चुनाव को चुनौती देने वाली एक याचिका बीते बुधवार को हो चुकी है खारिज
-महाराष्ट्र की अकोला पश्चिम सीट पर बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बनाया गया था आधार
-चुनाव पर रोक के बचे दो विकल्प, पुनर्विचार याचिका या सुप्रीम कोर्ट की लेनी होगी शरण
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। करनाल विधानसभा सीट पर उप चुनाव करवाने के भारतीय चुनाव आयोग के फैसले को लेकर बीते बुधवार को एक याचिका खारिज होने के बाद अब सोमवार को हाईकोर्ट ने तीन जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं के खारिज होने के साथ ही चुनाव को हाईकोर्ट की हरी झंडी मिल गई है। अब चुनाव पर रोक के लिए बुधवार को खारिज हुई याचिका में पुनर्विचार की अर्जी या सुप्रीम कोर्ट में आदेश को चुनौती यह दो विकल्प बचे हैं। एडवोकेट आरएस ढुल, संदीप गोयत व अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि जब विधानसभा का कार्यकाल एक वर्ष से कम रह गया हो तो उप चुनाव नहीं करवाया जा सकता है। हरियाणा में भी विधानसभा की अवधि एक वर्ष से कम है और ऐसे में चुनाव आयोग का उपचुनाव करवाने का निर्णय गलत है। करनाल विधानसभा सीट 13 मार्च को मनोहर लाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से कारण खाली हुई थी। हाईकोर्ट को बताया गया कि विधानसभा के आम चुनाव इस साल अक्टूबर में होने हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 151ए विधानसभा का कार्यकाल एक वर्ष से कम होने पर चुनाव आयोग को उप चुनाव करवाने से रोकती है। महाराष्ट्र के अकोला निर्वाचन क्षेत्र के लिए चुनाव आयोग ने 15 मार्च को चुनाव कार्यक्रम जारी किया था। इसे चुनौती देने वाली याचिका को मंजूर करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने उप चुनाव को रद्द कर दिया था। इस आदेश के बाद भारतीय चुनाव आयोग ने 27 मार्च को अकोला निर्वाचन क्षेत्र के संबंधित उपचुनाव की प्रक्रिया को रोक दिया था। इसी आदेश का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से करनाल उपचुनाव को रद्द करने का निर्देश जारी करने की अपील की गई थी। हाईकोर्ट ने सोमवार को इन जनहित याचिकाओं को खारिज करते हुए चुनाव का रास्ता साफ कर दिया है।