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Chandigarh News: अंगूर की फसल को मिला जीन कवच, अब फफूंद से खुद लड़ेंगे पौधे

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चंडीगढ़। अंगूर की खेती में फफूंद से होने वाले भारी नुकसान और महंगे फफूंदनाशकों पर निर्भरता अब भविष्य में काफी हद तक कम हो सकती है। पंजाब यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसे सुरक्षा जीन खोजे हैं जो पौधों की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर पाउडरी मिल्ड्यू जैसी खतरनाक फफूंद जनित बीमारी से लड़ने में मदद करते हैं। इस खोज से कम दवा, कम लागत और पर्यावरण के अनुकूल अंगूर की खेती का रास्ता खुल सकता है।
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पीयू के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों की टीम ने इस दिशा में अहम सफलता हासिल की है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल फंक्शनल प्लांट बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ता नैना गरेवाल, डॉ. नीतू गोयल, जयश्री और मोनिका भूरिया की टीम ने पाया कि अंगूर के पौधों में मौजूद दो खास एनएलआर जीन संक्रमण होते ही पौधे की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को तेजी से सक्रिय कर देते हैं। इससे पौधा लंबे समय तक बीमारी का मुकाबला करने में सक्षम रहता है।
टेस्ट में साबित हुई सुरक्षा जीन की ताकत
वैज्ञानिकों ने इन जीनों की प्रभावशीलता जांचने के लिए इन्हें अरैबिडॉप्सिस थालियाना नामक मॉडल पौधे में स्थानांतरित किया। परीक्षण में पाया गया कि संक्रमण के बाद पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से सक्रिय हुई और फफूंद का असर काफी हद तक कम हो गया। शोध में यह भी सामने आया कि पौधों के भीतर सैलिसिलिक एसिड, जैस्मोनिक एसिड, एथिलीन और एबीए जैसे हार्मोन सक्रिय होकर रोगों से लड़ने की क्षमता को और मजबूत बनाते हैं।
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कम दवा, कम खर्च... खेती होगी ज्यादा सुरक्षित
विशेषज्ञों के अनुसार पाउडरी मिल्ड्यू दुनियाभर में अंगूर उत्पादकों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। यह बीमारी उत्पादन घटाने के साथ फलों की गुणवत्ता भी खराब करती है जिससे किसानों को बार-बार महंगे रासायनिक फफूंदनाशकों का इस्तेमाल करना पड़ता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इन सुरक्षा जीनों की मदद से ऐसी नई अंगूर किस्में विकसित की जा सकेंगी जो प्राकृतिक रूप से रोग प्रतिरोधी होंगी। इससे रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम होगी, खेती की लागत घटेगी और टिकाऊ व पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

किसानों के लिए अहम है शोध
-बार-बार फफूंदनाशक दवा छिड़कने की जरूरत हो सकती है कम
-खेती की लागत घटने की संभावना
-फसल और फलों की गुणवत्ता बेहतर रहेगी
पर्यावरण पर रासायनिक दवाओं का कम होगा असर
रोग प्रतिरोधी नई अंगूर किस्में विकसित करने का खुलेगा रास्ता
क्या है पाउडरी मिल्ड्यू, आप भी जानें
फफूंद से होने वाली गंभीर बीमारी है। इसमें पत्तियों, तनों और फलों पर सफेद पाउडर जैसी परत बन जाती है। इससे पौधे की वृद्धि और फल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। साथ्त्पा ही दन में भारी कमी आ सकती है। इस पर नियंत्रण के लिए किसानों को बार-बार रासायनिक दवाओं का छिड़काव करना पड़ता है।
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