निर्वाचन आयोग से मांगी अनुमति, 31 अगस्त को हो सकती है बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश सरकार मौजूदा विधानसभा को भंग करने या सत्र बुलाने के लिए मंत्रिमंडल की 31 अगस्त को बैठक बुलाने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिख अनुमति मांगी है। दरअसल, संवैधानिक तौर पर दो सत्रों के बीच छह महीने की अवधि नहीं होनी चाहिए। ऐसे में 12 सितंबर से पहले एक सत्र को बुलाया जाना जरूरी है। यदि सरकार सत्र नहीं बुलाना चाहती है तो सरकार को मौजूदा विधानसभा को भंग करना होगा। इसके लिए मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई जानी जरूरी है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो राज्य की सभी शक्तियां राज्यपाल के पास चली जाएंगी। सैनी सरकार ने पिछला सत्र 13 मार्च को बुलाया था। इस हिसाब से सरकार को दूसरा सत्र 12 सितंबर से पहले बुलाया जाना जरूरी है। इस संबंध में हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बीते शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष याचिका भी दायर की है, जिसमें इस बात का विस्तार से उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास दो विकल्प हैं या तो सरकार सत्र बुलाए या फिर 12 सितंबर से पहले प्रदेश कैबिनेट की सिफारिश पर प्रदेश विधानसभा को समयपूर्व भंग किया जाए। विधानसभा भंग करने की स्थिति में सरकार को सत्र बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। समयपूर्व भंग हुई विधानसभा के मामले में 6 महीने में अगला सत्र बुलाने की संवैधानिक अनिवार्यता नहीं होती है।