एनडीपीएस के मामलों में रिपोर्ट की भूमिका बेहद अहम, देरी न हो सुनिश्चित करे समिति
आईएएस व आईपीएस की सूची करें तैयार, उनमें से गठित हो तीन सदस्यों वाली समिति
डिफाल्ट जमानत को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों को जारी किया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस) के मामलों में फॉरेंसिक साइंस लाइबोरेटरी (एफएसएल) रिपोर्ट में देरी के बढ़ते मामलों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए अब हरियाणा व पंजाब सरकार को तीन वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाने का आदेश दिया है। यह समिति एफएसएल के कामकाज की निगरानी करेगी और रिपोर्ट में देरी न हो यह सुनिश्चित करेगी। हाईकोर्ट ने इसके लिए तीन वरिष्ठ आईएएस व आईपीएस की सूची तैयार करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के समक्ष पंचकूला में नशा मुक्ति केंद्र चलाने वाले विनीत यादव की याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी जिसमें उसने हाईकोर्ट से जमानत की मांग की थी। एक अन्य याचिका हरियाणा सरकार की ओर से दाखिल की गई थी जिसमें ट्रायल कोर्ट से उसे मिली डिफॉल्ट जमानत रद्द करने की मांग की गई थी। यादव ने बताया था कि हाईकोर्ट में याचिका विचाराधीन रहते उसे ट्रायल कोर्ट से डिफॉल्ट जमानत मिल गई क्योंकि सरकार समय पर चालान नहीं पेश कर सकी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट में लंबित इस मामले का जिक्र नहीं किया। इसके साथ ही उसके पास से बड़ी मात्रा में नशीली सामग्री प्राप्त हुई है और ऐसे में उसकी डिफॉल्ट जमानत रद्द कर दी। हाईकोर्ट ने इस मामले में एफएसएल की रिपोर्ट में देरी को लेकर कहा कि हमारे सामने बड़ी संख्या में ऐसे मामले पहुंच रहे हैं जहां रिपोर्ट में देरी के कारण आरोपियों के निष्पक्ष ट्रायल का अधिकार प्रभावित हो रहा है। इस विषय पर हमारा मौन रहना न्यायालय के संवैधानिक कर्तव्यों को पूरा करने में विफलता होगी। ऐसे में हाईकोर्ट ने अब हरियाणा व पंजाब सरकार को एफएसएल के सही संचालन को सुनिश्चित करने के लिए कमेटी गठित करने का आदेश दिया है।