सरकारी स्कूलों में शिक्षा के लिए मोटा बजट आता है। प्राइवेट स्कूलों की तुलना ज्यादा शिक्षित शिक्षक हैं। बावजूद इसके प्रदेश के सरकारी स्कूल परिणाम के मामले में बुरी तरह पिछड़ रहे हैं। इस बार सरकारी स्कूलों के 59.73 फीसदी ही परीक्षार्थी पाए हुए जबकि प्राइवेट स्कूलों का परिणाम 69.53 फीसदी रहा।
पंचकूला, यमुनानगर ही दो जिले ऐसे रहे, जहां सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट से बेहतर परिणाम दिया है। पंचकूला में सरकारी स्कूलों का परिणाम 66.04 फीसदी रहा जबकि प्राइवेट का 62.04। यमुनानगर की बात करें तो सरकारी स्कूलों का परिणाम 68.95 फीसरी रहा जबकि प्राइवेट स्कूलों का परिणाम 67.72 रहा।
चरखी दादरी और भिवानी के सरकारी स्कूल रहे फिसड्डी
चरखी दादरी और भिवानी में प्राइवेट स्कूलों के सामने सरकारी स्कूल फिसड्डी साबित हुए। चरखी दादरी में सरकारी स्कूलों का परिणाम 52.14 फीसदी रहा जबकि प्राइवेट स्कूलों का परिणाम 78.3 फीसदी रहा। यानी 26.16 फीसदी अधिक। इसी तरह भिवानी में सरकारी स्कूलों का परिणाम 49.71 फीसदी रहा जबकि प्राइवेट स्कूलों का परिणाम 73.37 रहा। यानी 23.66 फीसदी अधिक। नूंह में सरकारी स्कूलों का परिणाम 48.58 फीसदी रहा और प्राइवेट स्कूलों का परिणाम 66.34 प्रतिशत। यानी प्राइवेट स्कूलों का परिणाम 17.76 फीसदी अधिक।