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अब नहीं खाने पड़ेंगे धक्के, मरीज तक खुद पहुंचेगा 'मोबाइल अस्पताल', जानें खासियतें

Sun, 03 Nov 2019 01:08 PM IST
ajay kumar गगन तलवार, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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बीमारी के इलाज के लिये मरीजों को अस्पतालों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। अब अस्पताल खुद इलाज के लिये मरीजों के घर द्वार तक पहुंचेगा। केंद्र सरकार इसके लिये व्यवस्था करने जा रही है। अब हर जिले में मोबाइल अस्पताल तैयार किये जाएंगे। ये चलते फिरते अस्पताल गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले, घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराएंगे। 

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किसी भी बीमारी के इलाज के लिए मरीज को भटकना ना पड़े और सबको स्वास्थ्य सुविधाएं मिले। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार यह योजना बना रही है। करनाल के सांसद संजय भाटिया ने बताया कि जल्द ही सरकार की तरफ से यह सौगात लोगों को दी जाएगी। निशुल्क इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना के बाद अब घर द्वार पर ही मरीज को इलाज की सुविधा देने जा रही है।  

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एमपी फंड से होगा पैसा खर्च, ये सुविधाएं मिलेंगी 

पश्चिमी यमुना नहर पर पहुंचे करनाल सांसद संजय भाटिया ने बताया कि मोबाइल अस्पताल की व्यवस्था का खर्च एमपी फंड से किया जाएगा। पांच साल के कार्यकाल के लिए उन्हें 25 करोड़ रुपये का फंड मिला है। जिसे वे लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के लिए ही खर्च करेंगे। मोबाइल अस्पताल एक चलाता फिरता अस्पताल होगा। जिसमें मरीज को घर पर ही दवाई, ब्लड समेत कई तरह के टेस्ट, एक्स-रे व अन्य चिकित्सा सुविधाएं लोगों को मिलेंगी। 

..ताकि अस्पताल में न खाने पड़े धक्के
अभी हर जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है। जहां लाइन में लगने के बाद कई बार मरीजों को डॉक्टर नहीं मिलते। अगर डॉक्टर मिल जाए, तो दवा नहीं मिलती। सांसद ने बताया कि इस तरह की दिक्कतों को खत्म करने की दिशा में ही मोबाइल अस्पताल चलाने का फैसला लिया गया है। करनाल में भी कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में 2000 से ज्यादा व सामान्य अस्पताल में 1500 ओपीडी होती है।
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