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Chandigarh News: हाईटेंशन तारों के निकट निर्माण पर सरकार ने नहीं दाखिल किया जवाब, 5 हजार जुर्माना

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-स्कूलों, अस्पतालों व उद्योगों के ऊपर से गुजरती तारों को लेकर कोर्ट मित्र ने जताई थी चिंता
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-हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बिजली की हाईटेंशन तारों के निकट भवन निर्माण की अनुमति व अनुमति देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर जवाब दाखिल न करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार पर 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। यह राशि पीजीआई चंडीगढ़ में गरीब मरीजों के कल्याण के लिए देने का न्यायालय ने निर्देश दिया है।
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इमारतों के नजदीक मौजूद हाई टेंशन तारों को लेकर हाईकोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान पर सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने इससे पहले बताया था कि हाईटेंशन लाइन को हटाने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। जिन मामलों में हाईटेंशन तारों के पास अवैध निर्माण हैं, उनमें मालिकों को बिजली विभाग ने नोटिस जारी किया है। इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि हाईटेंशन तारों के नीचे निर्माण की स्थिति में मंजूरी से जुड़ा कोई तंत्र मौजूद नहीं है। कोर्ट मित्र अनिल मल्होत्रा ने हाईकोर्ट को बताया था कि कई स्कूल, अस्पताल और उद्योग हाईटेंशन बिजली की लाइनों के नीचे हैं। उन्होंने सुझाव दिया था कि भविष्य में इस प्रकार की समस्या न आए, इसके लिए बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग, उद्योग विभाग और शिक्षा विभाग साथ बैठकर खाका तैयार करें। ऐसा करते हुए वर्तमान में मौजूद हाईटेंशन तारों के नीचे मौजूद निर्माण व अतिक्रमण हटाने पर निर्णय लिया जाए और भविष्य को लेकर दिशा-निर्देश तय किए जाएं। कोर्ट ने हाईटेंशन तारों के नीचे किसी भी इमारत के बिल्डिंग प्लान को मंजूरी न देने व इस प्रकार के अन्य उपाय के संबंध में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही निर्माण की मंजूरी देने वाले अधिकारियों पर जुर्माना लगाने को लेकर भी जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था।
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