मुख्य सचिव ने एडवाइजरी बोर्ड की बैठक में की योजनाओं की समीक्षा
डीबीटी योजनाओं को आधार कार्ड के बाद पीपीपी से जोड़ा जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। योजनाओं में पारदर्शिता लाते हुए नौ साल में राज्य सरकार ने कुल 3,674,833 अयोग्य या फर्जी लाभार्थियों को पकड़ा। इससे सरकार के 7822 करोड़ 69 लाख रुपये की बचत हुई है। इनमें काफी संख्या में ऐसे लोग थे, जो बिना योग्य होते हुए भी सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे थे, जबकि पात्र लोग इसके लिए धक्के खा रहे थेे। बुधवार को यहां मुख्य सचिव संजीव कौशल की अध्यक्षता में हुई एडवाइजरी बोर्ड की तीसरी बैठक में यह आंकड़े रखे गए। संजीव कौशल ने कहा कि 83 योजनाओं में से 74 योजनाएं का लाभ देना डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है और इन्हें आधार कार्ड से भी जोड़ा गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि कौशल विकास, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, कृषि, आयुष विभाग की 9 योजनाएं डीबीटी में शामिल नहीं की गई हैं। इन्हें भी एक सप्ताह में डीबीटी में शामिल करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, सभी योजनाएं परिवार पहचान पत्र के माध्यम से ही संचालित की जानी चाहिए।
25 दिसंबर को लांच होगा जन सहायक एप
संजीव कौशल ने कहा कि 25 दिसम्बर को जन सहायक एप को रिलांच किया जा रहा है। इसके बाद कॉमन सर्विस सेंटर पर चल रही सभी योजनाएं जन सहायक एप के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसके अलावा, हरियाणा के किसानों के लिए परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत 50,000 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता दी जाती है। हरियाणा के किसानों को 5 लाख एकड़ का लाभ दिया जाना है। इसमें से 62 प्रतिशत राशि किसानों को डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जाती है।