यूटी के प्रशासक शिवराज पाटिल का लगातार 14वां जन सुनवाई सत्र रद्द कर दिया गया है। सोमवार को भी यूटी सचिवालय में पाटिल का जन सुनवाई सत्र नहीं होगा।
इसके बाद इस माह के तीसरे सोमवार को जन्माष्टमी की छुट्टी के कारण सत्र नहीं होगा। अब तो हाल यह है कि लोगों ने भी आईटी विभाग के पास आवेदन करना भी बंद कर दिया है। शहर के लोग अब यही उम्मीद कर रहे हैं कि नए प्रशासक ही जन सुनवाई सत्र में उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे।
पाटिल ने लगभग सात महीनों से शहर के लोगों की शिकायतें नहीं सुनी हैं। शहर के 45 से अधिक लोग हर माह के पहले और तीसरे सोमवार जन सुनवाई सत्र में अपनी शिकायतों का निवारण होने का इंतजार कर रहे हैं। राज भवन ने भी आईटी विभाग को स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल जन सुनवाई सत्र नहीं होगा। हालांकि विभाग से लोगों की शिकायतों की फाइल मंगवाई गई है।
10 महीनों में दो बार दरबार:
पिछले दस महीने में पाटिल के 20 जन सुनवाई सत्र होने चाहिए थे, लेकिन सिर्फ दो बार ही हुए। अक्तूबर, 2013 के बाद पाटिल ने जनवरी, 2014 में लोगों की शिकायतों को सुना था। पाटिल का आखिरी सत्र 6 जनवरी, 2014 को हुआ था। फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई, जून और जुलाई में एक भी सत्र नहीं हुआ। अब अगस्त में भी जन सुनवाई सत्र होने की उम्मीद नहीं है।
कभी भी नियमित तौर पर नहीं हुआ सत्र
पाटिल का पांच साल का कार्यकाल 22 जनवरी, 2015 को पूरा हो रहा है। पाटिल ने अपने कार्यकाल में कभी भी नियमित तौर पर लोगों की शिकायतों को नहीं सुना। अब जब उनका कार्यकाल खत्म होने में लगभग पांच महीने ही बचे हैं तो उन्होंने लोगों से मिलना ही बंद कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि संसद का सत्र खत्म होने के बाद कुछ और राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति होनी है। इसी दौरान पाटिल का किसी दूसरे राज्य में तबादला हो सकता है।