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चंडीगढ़ में आज साइकिल से खरीदारी और शॉपिंग करने जाएं, दुकानदार डिस्काउंट देंगे, जानिए कितना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 22 Sep 2019 11:33 AM IST
साइकिलिंग - फोटो : फाइल फोटो
चंडीगढ़ के व्यापारी भी कार फ्री डे को पूरा तरह से सपोर्ट कर रहे हैं। लोगों को साइकिल चलाने को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापारियों ने ग्राहकों को साइकिल से आने पर डिस्काउंट ऑफर किया है। शहर के विभिन्न सेक्टरों की मार्केट में करीब 132 शोरूम पर डिस्काउंट दिया जाएगा।

इनमें सेक्टर-17ए की 9, सेक्टर-17 सी और डी की 21, सेक्टर-19सी की 20, सेक्टर-20 की 5, सेक्टर-24डी की 12, सेक्टर-32 डी की 5, सेक्टर-34सी की 7, सेक्टर-35बी की 7, सेक्टर-35सी की 5, सेक्टर-36डी की 3, सेक्टर-38सी की 9, सेक्टर-44डी की 12, सेक्टर-45 की 5 और सेक्टर-46 की 12 शोरूम में साइकिल पर जाने से डिस्काउंट दिया जाएगा।
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बेहतर कल के लिए आज छोड़ें कार

वर्ल्ड कार फ्री डे 22 सितंबर को मनाया जा रहा है। चंडीगढ़ को इसकी खास जरूरत है क्योंकि इस शहर में लोगों से ज्यादा वाहन हो गए हैं। अनुमान के मुताबिक, शहर की आबादी 12 लाख है जबकि केवल चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड गाड़ियों की संख्या 15 लाख पहुंच चुकी है। जितनी ज्यादा गाड़ियां होंगी, उतना ही ज्यादा तेल फुंकेगा। तेल जलेगा तो प्रदूषण बढ़ेगा। प्रदूषण बढ़ेगा तो पर्यावरण व स्वास्थ्य पर घातक असर पड़ेगा। इस बारे में यदि अभी नहीं सोचा तो आगे हालात और भयावह हो सकते हैं।

कार फ्री डे इस दिशा में किया जाने वाला एक छोटा सा प्रयास है। कार छोड़कर लोग दूसरे विकल्प जैसे कार पूलिंग या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे। चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस और साइकिलगिरी संस्था 22 व 23 सितंबर को कार पूल डे मना रहे हैं। शहर की कई संस्थाएं और लोग इसका समर्थन कर रहे हैं। जानते हैं कि चंडीगढ़ को इस दिन की क्यों जरूरत पड़ी। रिपोर्ट : आशीष वर्मा, रिशु राज सिंह

साइकिल पर चलने वाला शहर कारों में दौड़ने लगा
चंडीगढ़ में 70-80 के दशक में ज्यादातर लोग आवागमन के लिए साइकिल का प्रयोग करते थे। 80 के दशक में अचानक चारपहिया वाहनों का चलन बढ़ा और शहर में वाहनों की संख्या में इजाफा होने लगा। 80 के दशक में बाहर से सिटी में एक से डेढ़ हजार वाहनों का प्रवेश होता था। आज स्थिति बिल्कुल उलट गई है। अब सिटी की आबादी 12 लाख और गाड़ियों की संख्या 15 लाख तक पहुंच चुकी है। जीरकपुर, पंचकूला और मोहाली से रोजाना 2.5 लाख वाहनों का शहर में आना-जाना लगा रहता है। शहर में बाहरी राज्यों और जिलों से 60 हजार वाहन आते हैं।

जनसंख्या बढ़ने के साथ ही शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्रिब्यून चौक, हल्लोमाजरा चौक, मटका चौक, किसान भवन चौक समेत शहर के कई अन्य चौक-चौराहे जाम की गिरफ्त में रहते हैं। शुक्रवार को नॉर्दर्न जोनल काउंसिल की बैठक में मनोज परिदा ने कहा कि चंडीगढ़ में गाड़ियों की संख्या 15 लाख के करीब पहुंच गई है। पड़ोसी राज्यों से आने वाला ट्रैफिक भी काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि शहर की ट्रैफिक पुलिस मैनेजमेंट में काफी मेहनत करती है। अब इस दिशा में सोचने की जरूरत है।

एक कार के प्रदूषण को नियंत्रित करने में खर्च होती है 52 पेड़ों की आक्सीजन

पंजाब के ट्रैफिक एडवाइजर नवदीप असीजा ने हाईकोर्ट में दाखिल अपने एक हलफनामे में बताया था कि एक कार के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए करीब 52 पेड़ों की आक्सीजन खर्च होती है। इस आक्सीजन की यदि रुपये में कीमत निकालें तो यह लगभग 3500 रुपये प्रतिमाह है। चंडीगढ़ में जितनी कारें हैं, उनके प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए साल भर में 76 लाख पेड़ों की आक्सीजन जरूरत होती है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि चंडीगढ़ में 2194.8 लाख लीटर पेट्रोल व डीजल का इस्तेमाल साल भर में होता है। रोजाना करीब 6 लाख लीटर तेल की खपत चंडीगढ़ में होती है। एक लीटर तेल जलने के बाद उसके कण को ठिकाने लगाने में करीब 15.2 किलो फ्रेश एयर की जरूरत होती है। इसमें से 23 फीसदी आक्सीजन होती है। एक बड़ा पेड़ साल भर में 100 किलो आक्सीजन पैदा करता है। ऐसे में एक पेड़ द्वारा एक साल में पैदा की गई आक्सीजन एक कार के सप्ताह भर चलने में खर्च हो जाती है।

वाहनों से होने वाला ध्वनि प्रदूषण भी बेहद खतरनाक
वाहनों और हार्न की तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण फैलता है। तेज आवाज कान के पर्दों को हानि पहुंचा सकती है। कान के अंदर के हेयर सेल्स पूरी तरह से खत्म हो सकते हैं। इससे कान से सुनाई देना बंद हो सकता है। तेज आवाज से दिल की धड़कन बढ़ जाती है। ब्लड प्रेशर की शिकायत भी हो सकती है।

कुछ स्टडीज में यह भी दावा भी किया गया है कि बहुत अधिक शोरगुल मानव का खून गाढ़ा कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी तरफ खून का दबाव बढ़ सकता है, जिसके कारण हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत भी हो सकती है। ध्वनि प्रदूषण पशुओं के लिये भी खतरनाक साबित होता है। अधिक ध्वनि प्रदूषण के कारण जानवरों के प्राकृतिक रहन-सहन में भी बाधा उत्पन्न होती है। उनके खाने-पीने, आने-जाने और उनकी प्रजनन क्षमता और आदत में बदलाव आने लगता है।
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